UPI से भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए फिलहाल राहत की खबर है। लोकसभा ने एक ऐसा विधेयक पारित किया है, जिससे सरकार को भविष्य में UPI और अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या अन्य शुल्क लागू करने का कानूनी अधिकार मिल गया है। हालांकि, अभी UPI लेनदेन पर कोई नया शुल्क लागू नहीं किया गया है और आम उपभोक्ताओं के लिए UPI पहले की तरह मुफ्त रहेगा।
विधेयक के तहत पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में संशोधन किया गया है। इस संशोधन के जरिए पहले से लागू शुल्क-प्रतिबंध को हटाया गया है, जिससे सरकार जरूरत पड़ने पर अधिसूचना जारी कर UPI और अन्य निर्दिष्ट डिजिटल भुगतान पर शुल्क लागू कर सकेगी।
अभी नहीं देना होगा कोई चार्ज
सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल UPI भुगतान पर किसी प्रकार का शुल्क नहीं लगाया गया है। भविष्य में यदि MDR या कोई अन्य शुल्क लागू किया जाता है, तो उसके लिए अलग से अधिसूचना जारी की जाएगी। शुल्क की दर, किन लेनदेन पर लागू होगा और इसकी शर्तें बाद में तय की जाएंगी।
वित्त मंत्री ने क्या कहा?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यदि भविष्य में MDR लागू किया जाता है, तो उसका प्रभाव मुख्य रूप से व्यापारियों (Merchants) पर पड़ेगा, न कि आम UPI उपयोगकर्ताओं पर।
सरकार का तर्क
सरकार का कहना है कि यह संशोधन डिजिटल भुगतान प्रणाली को लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने के लिए एक कानूनी विकल्प उपलब्ध कराता है। इससे जरूरत पड़ने पर डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के संचालन और रखरखाव के लिए शुल्क संबंधी व्यवस्था लागू की जा सकेगी।
