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हमीरपुर: निर्माणाधीन पुल के नीचे अवैध खनन, 3 दर्जन ट्रैक्टरों से रातभर मोरम ढुलाई

रिपोर्ट – अंकित पांडेय 

हमीरपुर।जिले में सरकारी निर्माण कार्यों के आसपास अवैध खनन का मामला सामने आया है। लालपुरा थाना क्षेत्र के मोराकादर-कंडोर गांव के बीच बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल के नीचे कथित तौर पर शाम होते ही अवैध मोरम खनन शुरू हो जाता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि जेसीबी मशीन और करीब तीन दर्जन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की मदद से रातभर नदी से मोरम निकाली जा रही है। सबसे गंभीर बात यह है कि खनन का काम निर्माणाधीन पुल के पिलर के आसपास किए जाने का आरोप है, जिससे पुल की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

 पिलर के ठीक आसपास जेसीबी से खुदाई का आरोप

मोराकादर गांव के पास बेतवा नदी पर पुल का निर्माण कार्य चल रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक जून माह में आई तेज आंधी-तूफान के दौरान निर्माणाधीन पुल का एक पिलर टूटकर गिर गया था। ग्रामीणों का कहना है कि हादसे के बाद से अब तक उस पिलर का निर्माण दोबारा शुरू नहीं हो सका है।

इसी बीच आरोप है कि टूटे हुए पिलर के आसपास ही जेसीबी मशीन लगाकर मोरम की खुदाई की जा रही है। खुदाई के बाद मोरम को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर आसपास के ग्रामीण इलाकों में भेजा जाता है। ग्रामीणों के अनुसार कुछ मोरम को मौके से थोड़ी दूरी पर डंप भी किया जाता है, जहां से बाद में इसकी बिक्री की जाती है।

रात के अंधेरे में चलता है खनन और ढुलाई का सिलसिला

ग्रामीणों का दावा है कि शाम होते ही नदी किनारे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही बढ़ जाती है। करीब तीन दर्जन ट्रैक्टरों के जरिए मोरम की ढुलाई किए जाने की बात कही जा रही है। आरोप है कि जेसीबी से लगातार खुदाई कर मोरम निकाली जाती है और फिर ट्रैक्टरों में भरकर अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाई जाती है।

यदि ग्रामीणों के आरोप सही हैं तो यह मामला सिर्फ अवैध खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्माणाधीन पुल की सुरक्षा से भी सीधे जुड़ा हुआ है। नदी के भीतर और पुल के पिलर के आसपास अनियंत्रित खुदाई से भविष्य में निर्माण की मजबूती प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

रॉयल्टी के बिना खनन से राजस्व को नुकसान का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि बड़े पैमाने पर निकाली जा रही मोरम के लिए सरकारी राजस्व की अदायगी नहीं की जा रही है। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान होने की बात कही जा रही है। वहीं, अवैध खनन के चलते क्षेत्र में लगातार भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क और ग्रामीणों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

 पुलिस की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

इतने बड़े पैमाने पर कथित अवैध खनन और रातभर ट्रैक्टरों की आवाजाही को लेकर स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि लगातार कई ट्रैक्टर और जेसीबी नदी में सक्रिय हैं तो जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हो रही है।

मामले में जब लालपुरा थाना क्षेत्र के सीयूजी नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो नंबर स्विच ऑफ बताया गया। हालांकि, पुलिस की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पुल की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों में चिंता

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कराई जाए और निर्माणाधीन पुल के आसपास हो रही कथित खुदाई को रोका जाए। उनका कहना है कि यदि पुल के पिलर के आसपास इसी तरह खनन जारी रहा तो भविष्य में पुल की नींव और उसकी मजबूती पर गंभीर असर पड़ सकता है।

ग्रामीणों ने मौके पर छापेमारी कर अवैध खनन में इस्तेमाल हो रही मशीनों और वाहनों की जांच करने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे इस सरकारी पुल के आसपास यदि वास्तव में रात के अंधेरे में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है, तो जिम्मेदार विभाग कब कार्रवाई करेंगे? प्रशासन की जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि नदी में खनन की अनुमति थी या नहीं और पुल के पिलर के आसपास खुदाई किसकी अनुमति से की जा रही थी।

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