रिपोर्ट – अंकित पाण्डेय
हमीरपुर (सरीला)। सावन के अंतिम सोमवार को प्रसिद्ध श्री शल्लेश्वर धाम में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
मध्य प्रदेश के ओरछा धाम से बेतवा नदी का जल लेकर डाक कांवड़िये करीब 180 किलोमीटर की दूरी दौड़ते हुए तय कर सरीला पहुंचे और भगवान शल्लेश्वर महादेव का जलाभिषेक किया।

सिर्फ ओरछा ही नहीं, चंडौत, बसरिया, चित्रकूट, जटाशंकर और कानपुर के गंगा घाट से भी श्रद्धालु जल लेकर शल्लेश्वर धाम पहुंचे। इस दौरान बच्चों और महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर कांवड़ यात्रा में हिस्सा लिया। मंदिर परिसर में दिनभर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारे गूंजते रहे।

मंदिर के प्रवेश द्वार पर जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। कांवड़ियों और भक्तों की सुविधा के लिए जगह-जगह पेयजल व जलपान की व्यवस्था की गई थी। श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर पूजा-अर्चना की।

महाभारत काल से जुड़ा है इतिहास
जिला प्रशासन के अनुसार श्री शल्लेश्वर मंदिर का निर्माण महाभारत काल में महाराज शल्ल से जुड़ा माना जाता है। बाद में चंदेल काल में इसका जीर्णोद्धार कराया गया। मंदिर में स्थापित शिवलिंग के हर वर्ष बढ़ने की भी मान्यता है, जिसके कारण यह धाम दूर-दूर तक प्रसिद्ध है।
