न्यूज डेस्क ,लखनऊ
उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में सरकार ने एक और कदम उठाया है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत गठित अप्रेजल समिति ने 10 नई परियोजनाओं को आवश्यक शर्तों की पूर्ति के अधीन स्वीकृति देने की संस्तुति की है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में किसानों, उद्यमियों और युवाओं के लिए बड़ी संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र के विस्तार से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने के साथ ही बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
उन्होंने अधिकारियों को नीति-2023 के तहत मिलने वाली सुविधाओं, अनुदानों और प्रोत्साहनों को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
सोमवार को अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग बीएल मीणा की अध्यक्षता में खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय में अप्रेजल समिति की बैठक हुई।
इसमें पोर्टल के माध्यम से प्राप्त नए निवेश प्रस्तावों का परीक्षण किया गया। बैठक में कुल 12 आवेदनों पर विचार हुआ, जिनमें से 10 परियोजनाओं को सशर्त मंजूरी के लिए संस्तुति दी गई।
संस्तुत परियोजनाओं में कैटल फीड, अनाज और रिफाइंड मसाले, मूंगफली प्रसंस्करण, फ्रोजन खाद्य उत्पाद, रेडी-टू-कुक उत्पाद, तेल-आटा-दाल-बेसन निर्माण, दाल मिल तथा फ्रोजन फ्रूट्स और सब्जी प्रसंस्करण से जुड़ी इकाइयां शामिल हैं। कुछ परियोजनाओं में ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सोलर पावर प्लांट लगाने का भी प्रस्ताव है।
समिति ने परियोजनाओं में स्थानीय किसानों से कच्चे माल की खरीद, प्लांट मैप, फायर और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी प्रमाण-पत्र, उत्पादन क्षमता के उपयोग तथा विद्युत बिल समेत जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने जैसी शर्तों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
वहीं, एक प्रस्ताव को पात्रता पूरी नहीं होने के कारण निरस्त कर दिया गया। एक अन्य प्रस्ताव में प्लांट और मशीनरी से संबंधित जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने के बाद उसे अगली अप्रेजल समिति में रखने का निर्णय लिया गया।
समिति ने यह भी निर्देश दिया कि नीति-2023 के तहत पहली किस्त प्राप्त करने वाली इकाइयों को दूसरी किस्त जारी करने पर तभी विचार किया जाए, जब वे आरओएफसी के माध्यम से अपने उत्पाद का परीक्षण कराकर उसकी रिपोर्ट उपलब्ध कराएं।
सरकार का लक्ष्य खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में नए निवेश को बढ़ावा देने के साथ कृषि उपज का मूल्य संवर्धन बढ़ाना, किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और प्रदेश में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
