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झांसी में साइबर ठगी गिरोह का खुलासा, 50 से अधिक बंधक मुक्त; आठ गिरफ्तार, मास्टरमाइंड फरार

रिपोर्ट: दीपक जौहरी

झांसी। साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में झांसी पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। बबीना थाना और साइबर थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में नौकरी के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। पुलिस ने गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार करते हुए उनके कब्जे से बंधक बनाए गए 50 से अधिक महिला और पुरुषों को मुक्त कराया है।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, नकदी, डायरी, प्रमाण पत्र, कैशबुक और स्टांप समेत कई दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक गिरोह के तार उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान और बिहार तक फैले हुए हैं।

 

नौकरी का झांसा देकर लोगों को बुलाने का आरोप

शनिवार को पुलिस लाइन सभागार में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसएसपी विकास कुमार ने मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुलिस को पिछले कई दिनों से शिकायतें मिल रही थीं कि मैसर्स मां लक्ष्मी एसोसिएट नाम की कंपनी के कार्यालय में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को बुलाया जाता है।

शिकायतों के मुताबिक, नौकरी के इच्छुक लोगों से रकम लेने के बाद उन्हें कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा जाता था। इसके बाद उनसे अन्य लोगों को गिरोह में जोड़ने का काम कराया जाता था।

शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी के निर्देशन में साइबर थाना, बबीना थाना और बरुआ सागर थाना पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के बाद पुलिस टीम ने संबंधित स्थान पर छापेमारी कर 50 से अधिक महिला और पुरुषों को मुक्त कराया।

आठ आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने कार्रवाई के दौरान गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में राजस्थान के टोंक क्षेत्र के नरौली सिसोली निवासी रामसिंह मीणा, लखन मेहता, बबलू, बिहार के धर्मपुरा निवासी आलोक, राजस्थान के देवली निवासी प्रयागराज, टोंक निवासी मोहित वर्मा, सुरेंद्र और नितेश शामिल हैं।

आरोपियों के पास से आठ मोबाइल फोन, 7,300 रुपये नकद, छह डायरी, प्रमाण पत्र, कैशबुक और 20 रुपये के कई स्टांप बरामद किए गए हैं।

कई राज्यों में सक्रिय था गिरोह

एसएसपी के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान समेत कई राज्यों में सक्रिय था। आरोप है कि गिरोह चिटफंड कंपनी के रूप में पंजीकरण कराकर बेरोजगार युवक-युवतियों को नौकरी देने का झांसा देता था।

पुलिस के मुताबिक, नौकरी के नाम पर युवाओं से लाखों रुपये लिए जाते थे। इसके बाद उन्हें अन्य लोगों को गिरोह से जोड़ने के लिए दबाव में रखा जाता था। पुलिस अब गिरोह के नेटवर्क और इसके पीछे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।

मास्टरमाइंड की तलाश जारी

पुलिस का कहना है कि गिरोह का मुख्य सरगना अभी फरार है। एसएसपी विकास कुमार ने बताया कि मामले की विवेचना जारी है और मास्टरमाइंड की पहचान से जुड़ी जानकारी फिलहाल गोपनीय रखी गई है।

पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों और इसके अलग-अलग राज्यों में फैले नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।

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