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एनएचएम कर्मियों के वेतन में असमानता दूर करने की मांग, 98 हजार कर्मचारियों को एकरूप वेतन नीति का इंतजार

रिपोर्ट – प्रिया बाजपेई शुक्ला

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) में कार्यरत करीब 98 हजार कर्मचारियों के वेतन में असमानता का मुद्दा एक बार फिर तेज हो गया है। संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ ने सेवा अवधि, वरिष्ठता, पद, योग्यता, कार्य की प्रकृति और जिम्मेदारियों के आधार पर वेतन का पुनर्निर्धारण करने की मांग की है। संघ ने एनएचएम कर्मियों को आउटसोर्स सेवा निगम में शामिल करने की भी मांग उठाई है।

संघ के प्रदेश महामंत्री योगेंद्र उपाध्याय के अनुसार, एनएचएम में करीब 13 हजार सेवा प्रदाता (आउटसोर्स) और 75 हजार स्वास्थ्य समितियों के माध्यम से अनुबंधित कर्मचारी कार्यरत हैं। अन्य श्रेणियों को मिलाकर कर्मचारियों की संख्या करीब 98 हजार है। इन कर्मचारियों की स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन वेतन को लेकर अब भी एकरूपता नहीं है।

 स्थायी और एनएचएम कर्मियों के वेतन में बड़ा अंतर

संघ का कहना है कि स्थायी एएनएम को करीब 40 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है, जबकि एनएचएम में कार्यरत कर्मियों को लगभग 11 हजार रुपये मिल रहे हैं। इसी तरह स्थायी लैब सहायक को करीब 40 हजार रुपये, जबकि एनएचएम कर्मी को लगभग 13 हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है।

चतुर्थ श्रेणी के सामान्य संविदा कर्मचारी को करीब 18 हजार रुपये मासिक मिलते हैं, जबकि एनएचएम कर्मियों का वेतन करीब 10 हजार रुपये है। संघ ने सभी श्रेणियों में मौजूद इस वेतन विसंगति को दूर करने की मांग की है।

 दूसरे राज्यों के अनुरूप वेतन निर्धारण की मांग

योगेंद्र उपाध्याय के मुताबिक, वर्ष 2016 से एनएचएम कर्मियों की वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए सुझाव दिए जा रहे हैं। संघ का दावा है कि मध्य प्रदेश, बिहार और हरियाणा समेत कुछ राज्यों में कर्मचारियों के कार्य और दायित्व के अनुरूप वेतन का निर्धारण किया जा चुका है।

संघ के अनुसार, वर्ष 2018 से केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित आरओपी (Record of Proceedings) में एनएचएम के वेतन और मानव संसाधन संबंधी जरूरतों के लिए बजट का प्रावधान भी किया जा रहा है। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में वेतन विसंगतियां बनी हुई हैं।

 मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

कर्मचारी संघ ने मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की है। संघ ने चेतावनी दी है कि मांगों की अनदेखी होने पर स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करने वाला आंदोलन किया जा सकता है। हालांकि, स्वाइन फ्लू के चलते फिलहाल जनहित में आंदोलन की तारीख घोषित नहीं की गई है। संघ के अनुसार स्थिति सामान्य होने के बाद आंदोलन  की घोषणा की जाएगी।

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