लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में गोमती पुस्तक मेले के उद्घाटन को लेकर जहां सरकार की ओर से किताबों और शिक्षा के महत्व पर जोर दिया जा रहा है, वहीं छात्रों ने फीस वृद्धि, विश्वविद्यालय को मिलने वाले सरकारी अनुदान और शिक्षा के अधिकार जैसे मुद्दों को लेकर सवाल उठाए हैं। छात्रों का आरोप है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम से पहले पुलिस ने छात्रावास से कई छात्रों को हिरासत में लिया।
छात्रों के मुताबिक, वे मुख्यमंत्री के सामने लखनऊ विश्वविद्यालय में बढ़ी फीस वापस लेने और विश्वविद्यालय को पर्याप्त सरकारी अनुदान दिए जाने की मांग रखना चाहते थे। छात्रों का आरोप है कि सवाल उठाने से रोकने के लिए देर रात करीब 2:30 बजे पुलिस ने छात्रावास से कई छात्रों को हिरासत में ले लिया।

‘किताबों की बात हो रही, लेकिन फीस पर सवाल पूछने पर कार्रवाई’
छात्रों ने कहा कि पुस्तक मेले का आयोजन तभी सार्थक होगा, जब आम छात्र के पास किताबें खरीदने के लिए पर्याप्त संसाधन हों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हों।
छात्रों का कहना है कि एक ओर किताबों और शिक्षा को बढ़ावा देने की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर फीस बढ़ोतरी और विश्वविद्यालयों के लिए सरकारी संसाधनों जैसे बुनियादी सवाल उठाने वाले छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
छात्रों ने सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पुस्तक मेले का उद्घाटन करने आ रहे हैं, लेकिन जब छात्र शिक्षा, फीस और विश्वविद्यालय के संसाधनों को लेकर सवाल पूछना चाहते हैं तो उन्हें हिरासत में लिया जाता है। छात्रों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि सरकार से सवाल करना उनका अधिकार है।
लखनऊ विश्वविद्यालय के अनुदान को लेकर भी सवाल
छात्रों ने लखनऊ विश्वविद्यालय को मिलने वाले सरकारी अनुदान को लेकर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि विश्वविद्यालय को करीब 34 करोड़ रुपये वार्षिक सरकारी अनुदान मिलता है, जो विश्वविद्यालय की जरूरतों के मुकाबले पर्याप्त नहीं है।
छात्रों का आरोप है कि शिक्षा संस्थानों के लिए पर्याप्त बजट और संसाधन उपलब्ध कराने के बजाय सरकार की प्राथमिकताएं अलग दिखाई देती हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय का सरकारी अनुदान बढ़ाने की मांग की है।
फीस वृद्धि वापस लेने की मांग
छात्रों ने लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि को तत्काल वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि लगातार बढ़ता शिक्षा खर्च आम और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए परेशानी बढ़ा रहा है।
छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और संसाधन उपलब्ध कराना सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने फीस वृद्धि वापस लेने के साथ विश्वविद्यालय के लिए पर्याप्त सरकारी आर्थिक सहायता सुनिश्चित करने की मांग की।
छात्रों ने सरकार की शिक्षा नीति पर उठाए सवाल
छात्रों ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में बड़ी संख्या में प्राथमिक विद्यालयों के बंद या विलय किए जाने, शिक्षा के बढ़ते खर्च और छात्र-नौजवानों पर मुकदमे दर्ज किए जाने को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि पुस्तक मेले के आयोजन के साथ सरकार को शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इन मुद्दों पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनके मुताबिक, केवल किताबों का आयोजन करने से शिक्षा की स्थिति नहीं बदलेगी, बल्कि विद्यार्थियों को किताबें, बेहतर संस्थान और पर्याप्त संसाधन भी उपलब्ध कराने होंगे।
करीब 10 घंटे हिरासत में रखने का आरोप
छात्रों ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के लखनऊ विश्वविद्यालय पहुंचने के दौरान अनिल मास्टर, महेंद्र कुमार यादव, अतुल शुक्ला, शुभम खरवार, प्रिंस कुमार, शिवा जी यादव, रुस्तम सिंह, आदित्य पाण्डेय, रोहित यादव, प्रेम प्रकाश, जीतू कश्यप, अहमद रजा खान, नवनीत यादव, अक्षय वर्मा, अजितेंद्र आजाद, राणा सुधांशु सिंह, प्रियांशु यादव और अलोक यादव समेत कई छात्रों को करीब 10 घंटे तक डिटेन रखा गया।
छात्रों ने कहा कि गिरफ्तारी या हिरासत से उनकी आवाज दबाई नहीं जा सकती। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना छात्रों का अधिकार है और शिक्षा, फीस तथा विश्वविद्यालय से जुड़े मुद्दे उठाना कोई अपराध नहीं है।
‘हाथ में हथकड़ी नहीं, कलम हो’
छात्रों ने कहा कि पुस्तक मेले के साथ सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रदेश के हर छात्र के हाथ में किताब हो, विश्वविद्यालयों के पास पर्याप्त संसाधन हों और शिक्षा आम विद्यार्थियों की पहुंच में रहे।
छात्रों ने अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा कि फीस वृद्धि वापस ली जाए और लखनऊ विश्वविद्यालय का सरकारी अनुदान पर्याप्त रूप से बढ़ाया जाए। छात्रों ने कहा कि ‘कलम, किताब और कैंपस बचाने की लड़ाई जारी रहेगी।’
