नीम करौली बाबा की आध्यात्मिक विरासत एक बार फिर चर्चा में है। बाबा पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ को लेकर जहां देश-दुनिया में चर्चा हो रही है, वहीं उनकी जन्मस्थली से जुड़ी पुश्तैनी संपत्ति अब विवादों में घिर गई है। फिरोजाबाद के टूंडला क्षेत्र के अकबरपुर गांव में स्थित बाबा के पुश्तैनी मकान के स्वामित्व और प्रबंधन को लेकर उनके परिवार की छह पोतियों और श्री ठाकुर हनुमानजी ट्रस्ट के बीच विवाद सामने आया है।
अकबरपुर में हुआ था नीम करौली बाबा का जन्म
नीम करौली बाबा यानी लक्ष्मी नारायण शर्मा का जन्म फिरोजाबाद से करीब 15 किलोमीटर दूर अकबरपुर गांव में हुआ था। ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में मकान नंबर 154-व को उनका पुश्तैनी घर बताया गया है।
इसी परिसर में बाबा का ध्यान कक्ष, भोजनालय, अतिथि कक्ष और शयन कक्ष बने हुए हैं। वर्तमान में इस संपत्ति के रख-रखाव की जिम्मेदारी श्री ठाकुर हनुमानजी ट्रस्ट के पास है।
छह पोतियों ने डीएम से की शिकायत
बाबा के छोटे बेटे स्वर्गीय धर्म नारायण शर्मा की छह बेटियों सुनीता, अर्चना, वंदना, भावना, रितु और रिचा ने अगस्त में जिलाधिकारी को प्रार्थनापत्र दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के पदेन ट्रस्टी और सचिव संजय गुप्ता ने संपत्ति पर एकाधिकार कर लिया है।
शिकायतकर्ताओं ने पैतृक संपत्ति को कब्जामुक्त कराने और विवाद के स्थायी समाधान की मांग की है। उन्होंने डीएम की अध्यक्षता में एक नया ट्रस्ट गठित किए जाने का भी अनुरोध किया है। भावना के पति मनोज रावत ने मुंबई से आकर डीएम से मुलाकात की और मामले में कार्रवाई की मांग उठाई।
प्रशासन ने गठित की तीन सदस्यीय जांच समिति
मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम संतोष कुमार शर्मा के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। समिति के अध्यक्ष और एडीएम (न्यायिक) अरविंद द्विवेदी ने बाबा की छह पोतियों और ट्रस्ट के पदेन ट्रस्टी संजय गुप्ता को नोटिस जारी किया है।
दोनों पक्षों से संपत्ति पर अपनी दावेदारी से जुड़े साक्ष्य और दस्तावेज पेश करने को कहा गया है। प्रशासन का कहना है कि दोनों पक्षों को सुनने और दस्तावेजों की जांच के बाद निष्पक्ष तरीके से आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
बाबा के परिवार में थे दो बेटे और एक बेटी
नीम करौली बाबा गृहस्थ संत थे। उनके दो बेटे और एक बेटी थी। उनके बड़े बेटे अनेक शर्मा के पुत्र धनंजय शर्मा फिरोजाबाद में रहते हैं। वहीं छोटे बेटे धर्म नारायण शर्मा की छह बेटियों ने पुश्तैनी संपत्ति को लेकर शिकायत की है।
बाबा की बेटी गिरिजा भटेले आगरा में रहती हैं।
पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है अकबरपुर
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब सरकार नीम करौली बाबा की विरासत से जुड़े स्थानों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी कर रही है। जिलाधिकारी ने अकबरपुर पहुंचकर विकास कार्यों और प्रस्तावित कॉरिडोर की समीक्षा भी की है।
पर्यटन नीति-2022 में संशोधन के बाद नीब करौरी बाबा सर्किट को शामिल किया गया है। इस सर्किट में लखनऊ, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद और मथुरा-वृंदावन को जोड़ने की योजना है।
ऐसे में बाबा की जन्मस्थली और पुश्तैनी मकान का महत्व और बढ़ गया है। अब विवाद केवल मकान के स्वामित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि बाबा की विरासत से जुड़ी संपत्तियों के संरक्षण और भविष्य में उनके प्रबंधन का सवाल भी सामने है।
फिलहाल प्रशासन की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी कि संपत्ति को लेकर दोनों पक्षों की दावेदारी कितनी मजबूत है और बाबा की इस विरासत के संरक्षण व प्रबंधन की जिम्मेदारी आगे किस व्यवस्था के तहत तय होगी।
