रिपोर्ट – प्रिया़ बाजपेई शुक्ला
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को तेज बारिश के बीच इको गार्डन में अटेवा (ऑल टीचर्स एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन) के बैनर तले कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में कर्मचारी, शिक्षक, किसान और युवा शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने पुरानी पेंशन बहाल करने, सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर रोक लगाने और टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग उठाई।
अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कहा कि संगठन लंबे समय से इन मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है। उन्होंने कहा कि सुबह से हो रही तेज बारिश के बावजूद कर्मचारी इको गार्डन में डटे हुए हैं। यह उनकी एकजुटता और अपनी मांगों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि बारिश या ओलावृष्टि के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा और संगठन अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेगा।
निजीकरण युवाओं के भविष्य के लिए चुनौती
विजय कुमार बंधु ने कहा कि सरकारी संस्थानों का निजीकरण कर्मचारियों के साथ-साथ युवाओं के भविष्य के लिए भी गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि लगातार ऐसी खबरें सामने आती हैं, जिनमें ठेका और संविदा कर्मचारियों के शोषण की बात सामने आती है। उनका दावा है कि 10 से 12 हजार रुपये में संविदा कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कम वेतन और अधिक तनाव के कारण कर्मचारियों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल नहीं होती, सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर रोक नहीं लगती और टीईटी की अनिवार्यता समाप्त नहीं होती, तब तक अटेवा का संघर्ष जारी रहेगा।
2027 के चुनाव से पहले मांग पूरी करने की चेतावनी
प्रदेश विधिक सलाहकार नरेंद्र कुमार ने पुरानी पेंशन को शिक्षकों और कर्मचारियों का संवैधानिक एवं नैतिक अधिकार बताया। उन्होंने कहा कि संगठन इस मांग को लेकर हर स्तर पर संघर्ष करेगा और आंदोलन को और मजबूत बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले यदि कर्मचारियों की मांगें पूरी नहीं की गईं तो इसका असर मौजूदा सरकार पर पड़ेगा। संगठन अपनी मांगों को लेकर लगातार आंदोलन करता रहेगा।
प्रदर्शन की तस्वीरें
तेज बारिश के बावजूद इको गार्डन में कर्मचारी छाते लेकर प्रदर्शन करते नजर आए। प्रदर्शन स्थल पर कर्मचारियों की भीड़ और बारिश के बीच जारी आंदोलन की तस्वीरें सामने आईं।
