Homeउत्तर प्रदेशयूपी में सरकारी नौकरी के चरित्र सत्यापन के नियम बदले, हिंसक गतिविधियों...

यूपी में सरकारी नौकरी के चरित्र सत्यापन के नियम बदले, हिंसक गतिविधियों पर सख्ती

रिपोर्ट: प्रिया बाजपेयी शुक्ला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए अभ्यर्थियों के चरित्र सत्यापन से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों, परिषदों, निगमों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती के तहत चयनित होने वाले अभ्यर्थियों के लिए नए प्रावधान जारी किए हैं। इनके तहत हिंसा के जरिए व्यवस्था बदलने के उद्देश्य से काम करने वाले संगठनों से जुड़े लोगों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जा सकता है। हालांकि, केवल राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी अभ्यर्थी को नौकरी से वंचित नहीं किया जाएगा।

नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के अपर मुख्य सचिव एम. देवराज की ओर से हाईकोर्ट के आदेश के बाद ये नियम जारी किए गए हैं। नए प्रावधानों में आपराधिक मामलों, चरित्र सत्यापन, अस्थायी नियुक्ति और पुलिस की रिपोर्ट देने की समयसीमा को लेकर भी व्यवस्था स्पष्ट की गई है।

हिंसा के जरिए व्यवस्था बदलने वालों पर सख्ती

नए नियमों के मुताबिक, यदि कोई अभ्यर्थी ऐसे संगठन का सदस्य है, जिसका उद्देश्य हिंसा के जरिए व्यवस्था बदलना है, तो उसकी सरकारी नौकरी के लिए पात्रता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, किसी व्यक्ति की राजनीतिक विचारधारा या शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों के आधार पर उसे स्वतः अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा।

हाल के दिनों में दिल्ली, लखनऊ समेत देश के कई हिस्सों में जेन-जी आंदोलन और विभिन्न मुद्दों पर प्रदर्शन हुए थे। कुछ संगठनों की ओर से व्यवस्था परिवर्तन की मांग भी उठाई गई थी। ऐसे आंदोलनों को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए। इसी पृष्ठभूमि में चरित्र सत्यापन के नए नियमों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

गंभीर अपराधों में संलिप्तता पर भी नौकरी का प्रावधान

नए नियमों में हत्या, डकैती, बलात्कार, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने, भ्रष्टाचार, आतंकवादी गतिविधियों, पेपर लीक और सॉल्वर गैंग से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया गया है।

हालांकि, केवल एफआईआर दर्ज होने या जांच लंबित होने के आधार पर किसी अभ्यर्थी को स्वतः सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं माना जाएगा। पात्रता का फैसला मामले की स्थिति और लागू नियमों के अनुसार किया जाएगा।

21 वर्ष की उम्र के बाद दर्ज मामले भी होंगे अहम

नियमों में 21 वर्ष की उम्र पूरी करने के बाद दर्ज होने वाले मामलों और चरित्र सत्यापन के दौरान सामने आने वाली गतिविधियों का भी उल्लेख है। यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ संबंधित गतिविधियों से जुड़ा मामला दर्ज होता है और जांच के दौरान वह निर्धारित अवधि में ऐसी गतिविधियों में सक्रिय पाया जाता है, तो इसे उसकी वर्तमान गतिविधियों के आकलन में शामिल किया जा सकता है।

हालांकि, यदि संबंधित व्यक्ति के विचार और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव के संकेत मिलते हैं, तो उसकी नियुक्ति पर विचार करने का प्रावधान भी बताया गया है।

सिर्फ एफआईआर से नहीं रुकेगी नियुक्ति

नए प्रावधानों के अनुसार, केवल एफआईआर दर्ज होने या जांच जारी रहने से अभ्यर्थी को सरकारी नौकरी से बाहर नहीं किया जाएगा। बरी होने, समझौते और किशोर न्याय कानून के तहत आने वाले मामलों में भी स्वतः अयोग्यता लागू नहीं होगी।

पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का दोबारा चरित्र सत्यापन नहीं कराया जाएगा। इसके अलावा, यदि नियुक्ति के समय चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, तो अभ्यर्थी को केवल इसी वजह से नियुक्ति पत्र देने से नहीं रोका जाएगा।

ऐसे मामलों में अभ्यर्थी से स्वघोषणा पत्र और निर्धारित फॉर्म भरवाकर अस्थायी नियुक्ति पत्र जारी किया जा सकेगा। यदि बाद में अभ्यर्थी की ओर से गलत जानकारी देने या चरित्र सत्यापन में अयोग्य पाए जाने की पुष्टि होती है, तो नियुक्ति रद्द करने के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

30 दिन में पुलिस को देनी होगी सत्यापन रिपोर्ट

नए नियमों के तहत जिला पुलिस या स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) को चरित्र सत्यापन का आवेदन मिलने के 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट संबंधित नियुक्ति अधिकारी को देनी होगी। इस प्रक्रिया की निगरानी गृह विभाग करेगा।

सरकार की ओर से किए गए इन बदलावों का उद्देश्य भर्ती के दौरान चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया को स्पष्ट करना और रिपोर्ट मिलने में होने वाली देरी को कम करना बताया गया है।

RELATED ARTICLES

Most Popular