राजस्थान के दौसा जिले में 2020 में लापता हुए चार साल के टिल्लू उर्फ प्रिंस के किडनैपिंग और हत्या का सनसनीखेज मामला आखिरकार सुलझा है। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि मासूम के चाचा अनिल और बुआ कृष्णा ही इस हत्या के पीछे थे।
मासूम 16 अगस्त 2020 को अपने घर के आंगन से अचानक गायब हो गया था। परिवार और गांववालों ने खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। जांच में 100 से अधिक लोगों की डीएनए टेस्ट की गई और देशभर के लापता बच्चों के डेटा का विश्लेषण किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली।
जांच के दौरान शक बच्चे के ही रिश्तेदारों की ओर मुड़ा। चाचा और बुआ ने सख्ती से पूछताछ में जुर्म कबूल किया, लेकिन यह बताना मुश्किल था कि बच्चे को कहां दफनाया गया है। वारदात के समय एक्सप्रेसवे निर्माणाधीन था, इसलिए पुलिस ने हाईवे अथॉरिटी और मौसम विभाग की मदद ली। पुराने एरियल सर्वे और भू-स्तर के विश्लेषण से संभावित जगहों की पहचान की गई।
24 और 25 फरवरी को एक्सप्रेसवे किनारे चिन्हित पांच जगहों पर जेसीबी से खुदाई की गई, लेकिन अभी तक बच्चे का कंकाल बरामद नहीं हुआ। पुलिस अब एनएचएआई के सहयोग से और खुदाई की तैयारी कर रही है।
परिजनों का आरोप है कि पारिवारिक विवाद और जमीन-कर्ज के झगड़े के चलते मासूम की हत्या की गई। आरोपी रिश्तेदार घटना के बाद भी खोज अभियान में शामिल होते रहे ताकि किसी पर शक न हो। पुलिस दोनों आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही है और मामले की गहन जांच जारी है।
यह मामला सचमुच किसी थ्रिलर फिल्म की कहानी से कम नहीं है, जहां पुलिस ने तकनीकी, मौसम और ऐतिहासिक भू-आकृतियों का विश्लेषण कर 6 साल बाद भी मासूम के शव का राज उजागर करने की कोशिश की।
