रिपोर्ट: अमित शर्मा
आगरा नगर निगम में सफाई कार्य के लिए जारी नए निजी टेंडर को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। सफाई मित्रों, ड्राइवरों और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने पुराने कर्मचारियों की नौकरी पर संकट आने की आशंका जताई है। कर्मचारियों का कहना है कि निजी कंपनियों को सफाई कार्य सौंपने की नई व्यवस्था से वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। इसे लेकर टेंडर वापस लेने और रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई जा रही है।
इस मुद्दे पर कर्मचारियों से 22 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे नगर निगम मुख्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराने की अपील की गई थी। कर्मचारियों से बड़ी संख्या में एकजुट होकर निजी टेंडर का विरोध करने का आह्वान किया गया। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो सफाई कार्य ठप करने जैसा कदम उठाया जा सकता है।
पुराने कर्मचारियों के रोजगार को लेकर चिंता
कर्मचारियों को आशंका है कि नई निजी कंपनियों के आने के बाद मौजूदा कर्मचारियों को हटाया जा सकता है। इससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। उनका कहना है कि शहर की सफाई व्यवस्था को लंबे समय से संभाल रहे कर्मचारियों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
कर्मचारी चाहते हैं कि टेंडर की शर्तों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए। साथ ही यह बताया जाए कि नई व्यवस्था लागू होने पर वर्तमान सफाई मित्रों, ड्राइवरों और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित रहेगी या नहीं।

सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका
आगरा जैसे बड़े शहर में सफाई व्यवस्था का सीधा संबंध स्वच्छता और जनस्वास्थ्य से है। ऐसे में यदि कर्मचारी विरोध के चलते काम बंद करते हैं, तो शहर के विभिन्न इलाकों में सफाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इससे कचरा उठान और नियमित सफाई कार्य में भी बाधा आने की आशंका है।
फिलहाल कर्मचारियों की प्रमुख मांग निजी टेंडर को वापस लेने और रोजगार की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट आश्वासन देने की है। अब यह देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन कर्मचारियों की चिंताओं पर क्या रुख अपनाता है। टेंडर की शर्तों और प्रशासन के आधिकारिक पक्ष के सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नई व्यवस्था में मौजूदा कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं।
