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इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश में लापता लोगों की बढ़ती संख्या पर जताई चिंता

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश में लापता लोगों की बढ़ती संख्या का स्वत: संज्ञान लिया है। अदालत ने रजिस्ट्री को जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पाया कि पिछले दो साल में 1,08,300 लोग लापता हुए हैं, लेकिन पुलिस ने केवल 9,700 मामलों में ही कार्रवाई की है।

कोर्ट ने रवैये पर जताई नाराजगी
जस्टिस अब्दुल मुईन और जस्टिस बबीता रानी की बेंच ने हालात पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि अधिकारियों का रवैया ‘चौंकाने वाला’ है। बेंच ने टिप्पणी की, “हम लापता लोगों से जुड़ी शिकायतों पर अधिकारियों के रवैये से हैरान हैं। इसमें तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता है।”

याची का बेटा 2 साल से लापता
यह टिप्पणी विक्रमा प्रसाद की याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उनका बेटा जुलाई 2024 में लापता हो गया और पुलिस ने उसे ढूंढने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।

आंकड़े बताते हैं गंभीर स्थिति
गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव द्वारा अदालत को प्रस्तुत हलफनामे के अनुसार, 1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 के बीच पूरे राज्य में 1,08,300 लोगों की गुमशुदगी की शिकायतें दर्ज की गईं। लेकिन इनमें से सिर्फ 9,700 मामलों में ही कार्रवाई की गई, बाकी मामलों में अभी तक कोई कार्रवाई शुरू नहीं हुई।

अगली सुनवाई 5 फरवरी को
बेंच ने इस मामले को व्यापक जनहित का मुद्दा मानते हुए रजिस्ट्री को जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।

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