भारत के शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षाओं के पारदर्शी, सुचारू और निष्पक्ष संचालन के लिए विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है.
ये समिति परीक्षा प्रक्रिया के तंत्र में सुधार, डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल में सुधार और एनटीए के ढांचे और संचालन में सुधार को लेकर सिफ़ारिशें देगी.
समिति को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट शिक्षा मंत्रालय को पेश करनी होगी.
हाल के महीनों में भारत में हुई कई बड़ी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आए हैं.
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा को पेपर लीक की वजह से रद्द कर दिया गया था. हाल ही में एनटीए संचालित यूजीसी-नेट परीक्षा भी पेपर लीक की वजह से रद्द कर दी गई जबकि सीएसआईआर-यूजीसी-नेट परीक्षा को आशंकाओं के मद्देनज़र टाल दिया गया.
भारत के मेडिकल कॉलेजों में दाख़िलों के लिए होने वाली पात्रता परीक्षा नीट भी सवालों के घेरे में है और परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है.
बिहार पुलिस भी नीट परीक्षा के पेपर लीक होने की जांच कर रही है और कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
परीक्षाओं के रद्द होने, टलने और पेपर लीक के मामलों की वजह से छात्रों में भी आक्रोश है और छात्र संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं.
विपक्ष की कांग्रेस पार्टी भी नीट परीक्षा में कथित धांधली और अनियमितता को लेकर प्रदर्शन कर रही है.
कांग्रेसी सांसद राहुल गांधी ने कहा है कि वो पेपर लीक के मुद्दे को संसद में उठाएंगे. वहीं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों से सख़्ती से निबटा जाएगा.
यूजीसी-नेट पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है.
