मुंबई, 28 जनवरी 2026: मशहूर संगीतकार एआर. रहमान के हालिया ‘कम्युनल’ बयान को लेकर लगातार आलोचना हो रही है। राजनीति, मनोरंजन जगत और साधु-संतों के बाद अब इस पर पूर्व अभिनेत्री और साध्वी ममता कुलकर्णी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।
ममता कुलकर्णी ने कहा कि हर चीज की एक सीमा और उम्र होती है। उन्होंने बताया कि युवा पीढ़ी में सब्र कम हो गया है और संगीत अब उसी तरह की दुनिया बन गया है। उन्होंने कहा, “हम 90 के दशक में सब एक साथ काम करते थे। आमिर खान मेरे घर आकर बैठते थे। हम कभी धर्म या जात नहीं देखते थे। अब क्या बदल गया? बॉलीवुड में भेदभाव बढ़ गया है। लोग कहते हैं आमिर मुस्लिम हैं या हिंदू। यह सब बंद होना चाहिए। एक कलाकार सिर्फ कलाकार होता है, इसमें भेदभाव नहीं होना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि एआर. रहमान को खुश होना चाहिए कि लोग उनके संगीत के लिए उन्हें बुलाते हैं और उनका काम सराहते हैं।
एआर. रहमान ने 1992 में फिल्म रोजा से अपने करियर की शुरुआत की थी और 30 साल से अधिक समय से बॉलीवुड में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने संगीत और आवाज से लोगों के दिलों में खास जगह बनाई है। उनके सबसे प्रसिद्ध गानों में छैयां छैयां (दिल से), जय हो (स्लमडॉग मिलेनियर), ताल से ताल मिला (ताल), छोटी सी आशा (रोजा), मैया मय्या (गुरु) और कुन फाया कुन (रॉकस्टार) शामिल हैं। ममता कुलकर्णी का यह बयान बॉलीवुड में बढ़ते धार्मिक और जातीय भेदभाव पर उठाया गया एक महत्वपूर्ण सवाल है।
