नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ दाखिल याचिकाओं की सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के बीच बहस हुई।
ममता बनर्जी ने कोर्ट से आग्रह किया कि उन्हें खुद बंगाल का पक्ष रखने दिया जाए। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि “कोर्ट में कई काबिल वकील हैं, जैसे कि सिनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल, उन्हें दलीलें रखने दीजिए।” बावजूद इसके, ममता ने स्वयं ही दलीलें पेश कीं।
ममता ने एसआईआर पर आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया केवल नाम हटाने के लिए लागू की जा रही है। उन्होंने कहा कि शादी के बाद नाम बदलने वाली महिलाओं को भी नेम मिसमैच में डाला जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि कई बूथ लेवल ऑफिसर (BLOs) इस काम के दबाव में आत्महत्या तक कर चुके हैं।
चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने बताया कि माइक्रो ऑब्जर्वर की नियुक्ति नियमों के अनुसार की जा रही है, जिस पर ममता ने आपत्ति जताई। दोनों पक्षों की बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी और ममता से कहा कि ग्रुप बी के अधिकारियों की सूची उपलब्ध कराई जाए, जिन्हें SIR में लगाया जा सकता है।
