बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और लालू प्रसाद यादव के खिलाफ देवघर जिला कोषागार घोटाले में मिली सजा के निलंबन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अप्रैल से होगी।
CBI ने सजा निलंबन को चुनौती दी
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा कि लालू प्रसाद यादव सहित अन्य आरोपी अवैध रूप से बाहर हैं। सीबीआई की ओर से बताया गया कि यह स्थिति दोषसिद्धि के बाद बनी है और निलंबन जारी रखना कानून के खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने कहा कि फाइलें लंबित पड़ी हुई हैं और अप्रैल में सुनवाई की तारीख तय की जाएगी। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन मामलों में प्रतिवादी की मृत्यु हो गई है, उन्हें बंद कर दिया जाएगा।
देवघर चारा घोटाले का विवरण
देवघर जिला कोषागार घोटाला 1990 और 1994 के बीच का मामला है। आरोप है कि इस अवधि में देवघर ट्रेजरी से 89 लाख रुपये की कथित हेराफेरी हुई थी।
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इस घोटाले में देवघर जिला पशुपालन विभाग को दवा और अस्पताल के लिए 4.7 करोड़ रुपये दिए गए थे।
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आरोप है कि फेक रसीद के माध्यम से 89 लाख रुपये से अधिक की राशि अवैध रूप से निकाली गई।
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लालू पर पद का दुरुपयोग करने का आरोप है और कथित तौर पर उन्होंने जांच के लिए आवश्यक फाइलें अपने पास रोके रखी।
साल 2017 में CBI की स्पेशल कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव को 3.5 साल की सजा सुनाई थी।
सजायाफ्ता अन्य मामले
लालू प्रसाद यादव देवघर चारा घोटाला के अलावा 4 अन्य मामलों में भी सजायाफ्ता हैं:
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चाईबासा ट्रेजरी से अवैध निकासी के 2 मामले
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दुमका ट्रेजरी से अवैध निकासी
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डोरंडा मामला
सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई इस मामले की दिशा तय करेगी कि सजा निलंबन जारी रहेगी या नहीं। इस मामले पर देश की सबसे बड़ी अदालत की नजर बनी हुई है।
