देहरादून: उत्तराखंड सरकार देवभूमि परिवार पहचान पत्र योजना को कानूनी रूप देने की तैयारी में जुट गई है। राज्य सरकार ने इसके लिए एक अलग एक्ट (कानून) तैयार करने का निर्णय लिया है, जिसे फरवरी 2026 में होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। कैबिनेट से अनुमोदन मिलने के बाद इसे मार्च 2026 में गैरसैंण में प्रस्तावित बजट सत्र में विधानसभा में पेश किया जाएगा।
योजना का उद्देश्य और महत्व
देवभूमि परिवार पहचान पत्र योजना का लक्ष्य राज्य के प्रत्येक परिवार को एक यूनिक पहचान पत्र प्रदान करना है। इससे केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से योग्य लाभार्थियों तक पहुंचेगा।
पिछले साल नवंबर 2025 में कैबिनेट ने इस योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी। योजना हरियाणा के परिवार पहचान पत्र मॉडल की तर्ज पर तैयार की जा रही है।
नियोजन विभाग की जिम्मेदारी और तकनीकी तैयारी
योजना के क्रियान्वयन की नोडल जिम्मेदारी राज्य के नियोजन विभाग को सौंपी गई है। विभाग ने इसके लिए एक अलग प्रकोष्ठ का गठन किया है और तकनीकी स्तर पर पोर्टल भी तैयार किया गया है। इसके माध्यम से डेटा पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया को आसान और तेज़ बनाया जाएगा।
कैबिनेट और विधानसभा प्रक्रिया
प्रमुख सचिव नियोजन आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि योजना को स्थायी और कानूनी रूप से लागू करने के लिए एक्ट बनाना जरूरी है। फरवरी में कैबिनेट के अनुमोदन के बाद मार्च 2026 के बजट सत्र में इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा।
विधानसभा से पारित होने के बाद यह एक्ट लागू हो जाएगा और उत्तराखंड में देवभूमि परिवार पहचान पत्र योजना की औपचारिक शुरुआत हो सकेगी।
लाभ और सरकारी योजनाओं पर प्रभाव
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सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग बेहतर होगी।
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फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगेगी।
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जरूरतमंद परिवारों तक योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचेगा।
सरकार इसे सुशासन की दिशा में बड़ा कदम मान रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि मार्च 2026 के भीतर पूरे प्रदेश में योजना लागू कर दी जाएगी।
