ईसाई धर्म में गुड फ्राइडे, होली सैटरडे और ईस्टर संडे को बेहद महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व माना जाता है। साल 2026 में Good Friday 03 अप्रैल को मनाया गया, जिसके दो दिन बाद 05 अप्रैल को Easter Sunday मनाया जाएगा। इन तीनों दिनों का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है।
गुड फ्राइडे के बाद आने वाला दिन होली सैटरडे कहलाता है, जिसे शोक, मौन और प्रतीक्षा का प्रतीक माना जाता है। इस दिन ईसाई श्रद्धालु प्रार्थना और आत्मचिंतन में समय बिताते हैं। यह दिन उस समय की याद दिलाता है जब Jesus Christ को सूली पर चढ़ाए जाने के बाद उनके अनुयायी शोक में थे।
ईसाई मान्यताओं के अनुसार, ईस्टर संडे का संबंध Jesus Christ के पुनर्जीवन से है। माना जाता है कि गुड फ्राइडे के दिन उन्हें क्रूस पर चढ़ाया गया था और इसके दो दिन बाद, यानी रविवार को वे पुनर्जीवित हुए। इसी घटना की स्मृति में ईस्टर मनाया जाता है, जो विश्वास, आशा और नए जीवन का प्रतीक है।
ईस्टर के दिन दुनियाभर के चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की जाती हैं। लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और परिवार के साथ इस पर्व को खुशी और उत्साह के साथ मनाते हैं। यह दिन यह संदेश देता है कि हर अंधकार के बाद उजाला अवश्य आता है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पुनर्जीवन के बाद Jesus Christ लगभग 40 दिनों तक अपने अनुयायियों के बीच रहे और उन्हें प्रेम, दया, क्षमा और करुणा का संदेश दिया।
गौरतलब है कि ईस्टर की तारीख हर साल बदलती है। इसका निर्धारण खगोलीय गणना के आधार पर किया जाता है और यह वसंत ऋतु की पहली पूर्णिमा के बाद आने वाले रविवार को मनाया जाता है।
इस प्रकार, ईस्टर केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और जीवन में नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
