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भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील का फ्रेमवर्क जारी, किसानों के हित सुरक्षित, निर्यात को मिलेगी नई रफ्तार

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) का फ्रेमवर्क जारी कर दिया है। इस कदम से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया को नई गति मिली है।केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका इस फ्रेमवर्क को शीघ्र लागू करने की दिशा में मिलकर काम करेंगे।

किसानों के हितों पर कोई समझौता नहीं

इस ट्रेड डील को लेकर कृषि और डेयरी सेक्टर पर मंडरा रहा संशय अब पूरी तरह खत्म हो गया है। मोदी सरकार ने साफ किया है कि भारतीय किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।पीयूष गोयल ने बताया कि मक्का, गेहूं, चावल, सोयाबीन, पोल्ट्री, दूध, पनीर, एथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस जैसे संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों को पूरी तरह से संरक्षित रखा गया है।

उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के साझा संकल्प को दर्शाता है, जिससे दोनों देशों के नागरिकों और कारोबारियों को बड़ा लाभ मिलेगा।

कपड़ा और मशीनरी सेक्टर को राहत, टैरिफ में कटौती

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत अमेरिका से आने वाले औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ को लेकर दोबाराविचार करेगा।विशेष रूप से मेवे, फल, सोया तेल, शराब और अन्य खाद्य उत्पादों पर या तो टैरिफ घटाया जाएगा या पूरी तरह हटाया जा सकता है।

वहीं अमेरिका ने भारतीय वस्त्र, परिधान और मशीनरी जैसे उत्पादों पर लगाए जाने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला किया है, जिससे भारतीय निर्यात को बड़ी राहत मिलेगी।

किसानों और मछुआरों को मिलेगा 30 ट्रिलियन डॉलर का बाजार

पीयूष गोयल ने कहा कि इस ट्रेड डील से छोटे व्यापारियों, किसानों और मछुआरों को अमेरिका जैसे 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाले विशाल बाजार तक पहुंच मिलेगी। निर्यात बढ़ने से महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

रेसिप्रोकल टैरिफ घटने से भारतीय कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर, प्लास्टिक और रबर उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प और चुनिंदा मशीनरी सेक्टर को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में व्यापक बाजार मिलेगा।

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