उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में पुलिस और एसओजी ने एक अंतर-जनपदीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो फर्जी सरकारी दस्तावेज बनाने और लोगों को धोखा देने में लिप्त था। इस कार्रवाई में गिरोह के चार सदस्य पकड़े गए हैं, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है।
मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई
परसरामपुर पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम को कुछ समय से सूचना मिल रही थी कि क्षेत्र में फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र और सरकारी दस्तावेजों के जरिए योजनाओं का दुरुपयोग हो रहा है। पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह के निर्देश पर टीम ने मुखबिर की पक्की जानकारी के आधार पर परसरामपुर बाजार के जनसेवा केंद्र पर छापा मारा।
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मौके पर मौजूद लोग भागने की कोशिश में थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें दबोच लिया।
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तलाशी के दौरान नकली मोहरें, लैपटॉप, प्रिंटर, लेमिनेशन मशीन और भारी मात्रा में फर्जी फॉर्म बरामद हुए।
भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद
पुलिस ने जिन दस्तावेजों और सामान को जब्त किया, उनमें शामिल हैं:
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उप-जिलाधिकारी, तहसीलदार और पुलिस अधिकारियों की नकली मोहरें
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फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और आय-जाति प्रमाण पत्र
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इंक पैड और अन्य प्रिंटिंग सामग्री
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उच्च श्रेणी के लैपटॉप और प्रिंटर
गरीब और अनपढ़ लोगों को बनाता था निशाना
पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह गिरोह गरीब और अनपढ़ लोगों को निशाना बनाता था।
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सरकारी पेंशन और अन्य सुविधाओं का लालच देकर फर्जी दस्तावेज बनवाता था
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प्रति व्यक्ति 5 से 10 हजार रुपये वसूल करता था
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दस्तावेजों का उपयोग पेंशन, रियायती ट्रेन यात्रा और भीख मांगने जैसे कामों के लिए होता था
गिरोह और जांच की स्थिति
पकड़े गए चार अभियुक्तों में तीन गोंडा के निवासी हैं और एक स्थानीय निवासी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं इस गिरोह के संबंध सरकारी विभाग के कर्मचारियों से तो नहीं हैं।
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पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह ने कहा कि फर्जी दस्तावेज बनाने वालों के साथ-साथ फर्जी लाभार्थियों पर भी कार्रवाई होगी।
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आगामी दिनों में और भी गिरफ्तारियां संभव हैं।
