गोरखपुर, 7 अप्रैल। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को साकार करते हुए गोरखपुर नगर निगम ने शहरी प्रबंधन में नई मिसाल कायम की है। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से विकसित एआई आधारित अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम ने मानसून के दौरान जलभराव की समस्या को कम करने में 65 प्रतिशत से अधिक सुधार दर्ज किया है।
यह देश का पहला एआई आधारित अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सेल (यूएफएमसी) है, जिसे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और नीति आयोग द्वारा भी सराहना मिली है।
नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल के अनुसार, इस सिस्टम के लागू होने के बाद 24 घंटे पहले वर्षा और जलभराव का पूर्वानुमान 80 प्रतिशत से अधिक सटीक हो गया है। ट्रायल के दौरान दर्ज 250 से अधिक शिकायतों में से 70 प्रतिशत का समाधान कुछ ही घंटों में किया गया, जबकि सिस्टम की समग्र कार्यक्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।
इस अत्याधुनिक व्यवस्था में एआई आधारित पूर्वानुमान, सेंसर के जरिए जलस्तर की निगरानी और स्टॉर्म वाटर मॉडलिंग को एकीकृत किया गया है। जलस्तर बढ़ने पर सेंसर तुरंत अलर्ट भेजते हैं और ऑटोमेटिक पंपिंग सिस्टम सक्रिय हो जाता है, जिससे जलभराव वाले क्षेत्रों में तत्काल राहत मिलती है।
नीति आयोग ने अपने मूल्यांकन में इस मॉडल को देशभर के शहरी निकायों के लिए उपयोगी बताते हुए इसे रिएक्टिव से प्रोएक्टिव शहरी प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम माना है। इस यूएफएमसी का उद्घाटन 23 जुलाई 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया गया था।
इस परियोजना के तहत शहर में 28 जलभराव हॉटस्पॉट और 85 संवेदनशील स्थानों की पहचान की गई है। सभी पंपिंग स्टेशनों को पूरी तरह ऑटोमेटेड किया गया है और 24×7 इमरजेंसी कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। साथ ही नागरिकों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी विकसित किया गया है।
शहर में लगाए गए ऑटोमैटिक रेन गेज हर 15 मिनट में बारिश की जानकारी देते हैं, जबकि 110 से अधिक सेंसर जलस्तर की लगातार निगरानी करते हैं। जलस्तर निर्धारित सीमा से अधिक होने पर अधिकारियों को तुरंत अलर्ट मिलता है और पंप स्वतः चालू हो जाते हैं।
इस तकनीक के चलते जलभराव से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण में लगने वाला समय 10–12 घंटे से घटकर 1–2 घंटे रह गया है। वहीं, पंप बंद होने की घटनाओं में भी 60 प्रतिशत की कमी आई है।
गोरखपुर मॉडल अब देशभर के शहरों के लिए एक उदाहरण बनकर उभर रहा है, जिसने न केवल जलभराव की समस्या को कम किया है बल्कि त्वरित प्रतिक्रिया, जवाबदेही और नागरिक संतुष्टि में भी बड़ा सुधार किया है।
