सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला गोरखपुर का रंगपर्व इस बार भी पूरे देश की नजर में रहेगा। Gorakshapeeth की सहभागिता से निकलने वाली दो प्रमुख शोभायात्राएं होलियाना माहौल में आकर्षण का केंद्र बनेंगी। इन दोनों आयोजनों में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath शामिल होंगे।
Holika Dahan और Narsingh Shobha Yatra का खास महत्व
हर साल की तरह एक शोभायात्रा होलिकादहन की शाम को पांडेयहाता से निकलेगी, जिसमें भक्त प्रह्लाद की झांकी प्रमुख आकर्षण होगी। वहीं दूसरी रंगभरी शोभायात्रा होली के दिन सुबह घंटाघर से निकाली जाएगी, जिसमें भगवान नृसिंह की झांकी निकलेगी।
भगवान नृसिंह शोभायात्रा की शुरुआत 1944 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक Nanaji Deshmukh ने अपने गोरखपुर प्रवास के दौरान की थी। इसका उद्देश्य होली के अवसर पर फूहड़ता को समाप्त कर सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना था।
दशकों से जुड़ा है Gorakshapeeth का नाता
नानाजी देशमुख के अनुरोध पर इस शोभायात्रा का जुड़ाव गोरक्षपीठ से हुआ। ब्रह्मलीन महंत Digvijayanath और बाद में महंत Avaidyanath ने इसे सामाजिक समरसता के अभियान से जोड़ा।
बतौर गोरक्षपीठाधीश्वर, योगी आदित्यनाथ 1996 से 2019 तक शोभायात्रा का नेतृत्व करते रहे। कोरोना काल (2020-21) को छोड़कर वे लगातार इसमें शामिल होते रहे हैं। 2022 से फिर वे होलिकादहन और नृसिंह शोभायात्रा में भाग ले रहे हैं।
सामाजिक समरसता का संदेश
गोरखपुर का रंगोत्सव छुआछूत, जातीय भेदभाव और ऊंच-नीच की खाई पाटने का प्रतीक माना जाता है। नाथपंथ की परंपरा “लोक कल्याण” पर आधारित है और इसी संदेश को आगे बढ़ाते हुए सीएम योगी रंगों में सराबोर होकर बिना भेदभाव लोगों से मिलते हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता शोभायात्रा के पथ नियोजन की जिम्मेदारी संभालते हैं। अब यह आयोजन मथुरा-वृंदावन की होली की तरह प्रसिद्ध हो चुका है और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसे सामाजिक समरसता के पर्व के रूप में देखा जाता है।
