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Harish Rana Case: जड़ी-बूटियां लेकर पहुंचे बाबा, ठीक करने का दावा; 6 घंटे गेट पर इंतजार

गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज एंपायर सोसायटी में रहने वाले हरीश राणा के मामले में शुक्रवार को नया घटनाक्रम सामने आया। राजस्थान के भीलवाड़ा से स्वामी अखंडानंद जड़ी-बूटियां और आयुर्वेदिक दवाएं लेकर हरीश से मिलने पहुंचे और उन्हें ठीक करने का दावा किया। हालांकि परिवार ने चिकित्सकों की सलाह का हवाला देते हुए उपचार कराने से इनकार कर दिया।

छह घंटे तक गेट पर करते रहे इंतजार

स्वामी अखंडानंद करीब छह घंटे तक सोसायटी के गेट पर परिवार से मिलने का इंतजार करते रहे। जब कोई मिलने नहीं आया तो उन्होंने एक पत्र भिजवाया। इसके बाद हरीश के पिता अशोक राणा उनसे मिलने पहुंचे।

अशोक राणा ने बताया कि उन्होंने बाबा को पानी और जूस पिलाया और बेटे की हालत के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हरीश का हर संभव इलाज कराया जा चुका है, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक उसके मस्तिष्क की नसें सूख चुकी हैं और खून की आपूर्ति भी नहीं हो रही है, जिससे मस्तिष्क सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है।

जड़ी-बूटियों से इलाज का दावा

अशोक राणा के अनुसार बाबा ने कई जड़ी-बूटियों और आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में बताया और अपना मोबाइल नंबर भी दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की बीमारी से पीड़ित कई बच्चों के माता-पिता उनके संपर्क में हैं और वे उन्हें बाबा के बारे में जानकारी देंगे। उन्होंने कहा कि “किसकी दवा या दुआ कब असर कर जाए, यह कहना मुश्किल है।”

भीलवाड़ा में है बाबा का आश्रम

स्वामी अखंडानंद ने बताया कि उन्होंने समाचारों में हरीश के बारे में सुना तो सेवा भाव से यहां आए। उनका दावा है कि यदि कोमा या लकवाग्रस्त मरीज को समय रहते उनके पास लाया जाए तो आयुर्वेदिक उपचार से ठीक किया जा सकता है।उन्होंने बताया कि उनका भीलवाड़ा में आश्रम है और उन्होंने आयुर्वेद में एमडी की पढ़ाई की है।

एम्स ले जाया गया हरीश

शनिवार सुबह हरीश राणा को गाजियाबाद से दिल्ली स्थित एम्स ले जाया गया। परिवार सुबह करीब आठ बजे तीन निजी वाहनों से राज एंपायर सोसायटी से रवाना हुआ। इस दौरान केवल करीबी रिश्तेदार और कुछ दोस्त ही साथ मौजूद थे।सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन के अनुसार, पिछले 13 वर्षों से बेड पर असहनीय पीड़ा झेल रहे हरीश को सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति मिली है और इसकी प्रक्रिया एम्स में पूरी की जानी है। हालांकि परिवार ने स्वास्थ्य विभाग को पहले से इसकी जानकारी नहीं दी थी।पड़ोसियों के अनुसार, हरीश को व्हीलचेयर पर लिफ्ट से बेसमेंट तक लाया गया और वहां से निजी वाहन में बैठाकर परिवार एम्स के लिए रवाना हो गया। इस दौरान परिवार के सभी सदस्यों की आंखें नम थीं।

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