गाजियाबाद के हरीश राणा अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन जाते-जाते वह मानवता और अंगदान की ऐसी मिसाल छोड़ गए, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की अनुमति मिलने के बाद दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती हरीश राणा का निधन हो गया। उनके परिवार ने दुख की इस घड़ी में बड़ा फैसला लेते हुए उनके कॉर्निया और हार्ट वॉल्व दान कर दिए।
करीब 12 साल पहले 2013 में एक इमारत से गिरने के बाद हरीश राणा स्थायी वेजिटेटिव स्टेट में चले गए थे। परिवार ने लंबे समय तक उनका इलाज कराया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां मार्च 2026 में अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट और परिस्थितियों को देखते हुए लाइफ सपोर्ट हटाने की अनुमति दी।
24 मार्च को हरीश राणा को पेलिएटिव केयर के तहत एम्स दिल्ली में भर्ती कराया गया था। निधन के बाद डॉक्टरों की विशेष टीम ने पूरे सम्मान और संवेदनशीलता के साथ अंगदान की प्रक्रिया पूरी की। डॉक्टरों के मुताबिक, कॉर्निया डोनेशन से चेहरे पर किसी तरह की विकृति नहीं आती, जबकि हार्ट वॉल्व निकालने की प्रक्रिया भी पूरी गरिमा के साथ की जाती है।
इस मामले की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की बेंच में शामिल जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन ने भी हरीश राणा के परिवार की सराहना की। अदालत ने कहा कि परिवार ने निस्वार्थ भाव से अंगदान कर मानवता की अनूठी मिसाल पेश की है। कोर्ट ने भावुक टिप्पणी करते हुए कहा कि हरीश राणा अब उन लोगों के जरिए जिंदा रहेंगे, जिन्हें इस दान से नई जिंदगी और नई रोशनी मिलेगी।
