नई दिल्ली: डायबिटीज केवल ब्लड शुगर की समस्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नसों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति को समय पर न पहचानना गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है।
डायबिटीज के लंबे समय तक उच्च ब्लड शुगर स्तर के कारण नसों तक पोषण नहीं पहुँच पाता, जिससे नसें ठीक से काम नहीं करतीं। इसे डायबिटिक पेरिफेरल न्यूरोपैथी कहा जाता है। शुरुआती लक्षणों में हाथों और पैरों में झुनझुनी, जलन, सुन्नपन और रात में अचानक दर्द शामिल हैं। मरीजों का कहना है कि कई बार पैरों में ऐसा लगता है जैसे वे रूई पर चल रहे हों या तेज चुभन हो रही हो। अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो यह शरीर की कमजोरी, संतुलन बिगड़ना और पैरों में घाव जैसी समस्याओं तक पहुंच सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या विटामिन B12 की कमी से और जटिल हो सकती है। खासतौर पर वे मरीज जो लंबे समय से मेटफॉर्मिन दवा ले रहे हैं, उनमें B12 की कमी होने का खतरा ज्यादा होता है। B12 की कमी के लक्षण न्यूरोपैथी से मिलते-जुलते हैं, इसलिए बिना जांच के असली वजह का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
डॉ. V मोहन ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि मरीजों को दर्द बढ़ने का इंतजार नहीं करना चाहिए। शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। इलाज की शुरुआत ब्लड शुगर नियंत्रण से होती है। इसके साथ ही B12 की जांच कराना और जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंट लेना भी आवश्यक है। कई मामलों में डॉक्टर B कॉम्प्लेक्स दवाएं देते हैं, जो नसों को मजबूत करने और लक्षणों को कम करने में मदद करती हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि डायबिटीज के मरीज हाथ-पैर में झुनझुनी, सुन्नपन या जलन को नजरअंदाज न करें और समय पर डॉक्टर से जांच कराएँ।
