जर्मनी में दक्षिणपंथी पार्टी एएफडी (अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी) ने पूर्वी राज्य शोरेंजिया में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. इस पार्टी ने आप्रवासन के मुद्दे पर चुनाव लड़ा था.
दूसरे विश्व युद्ध के बाद ऐसा पहली बार है, जब कोई दक्षिणपंथी पार्टी जर्मनी में क्षेत्रीय चुनाव जीती है.
एएफडी कुल वोट का क़रीब एक तिहाई जीती है. वो कंजरवेटिव पार्टी सीडीयू (क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन ऑफ जर्मनी) से नौ पॉइंट आगे है. उसने जर्मनी की तीनों सत्ताधारी पार्टियों को भी पीछे छोड़ दिया है.
इसके साथ ही शोरेंजिया के पड़ोसी राज्य सैक्सोनी में एएफडी रविवार को दूसरे स्थान पर रही.
सैक्सोनी राज्य के आंकड़े बताते हैं कि सीडीयू यहां कुल वोट का 32 प्रतिशत हासिल कर सकती है. यहां वो एएफडी से एक पॉइंट आगे है. हालांकि यहां भी वो तीनों सत्ताधारी पार्टियों- सोशल डेमोक्रेट्स, ग्रीन्स और लिबरल एफडीपी (फ्री डेमोक्रेटिक पार्टी) को पछाड़ रही है.
एएफडी पार्टी के सबसे बड़े नेता ब्योर्न होक हैं. वो जर्मनी के विवादों में रहने वाले नेता हैं. होक इतिहास के शिक्षक थे. उन पर नाज़ी स्लोगन इस्तेमाल करने पर जुर्माना लग चुका है. हालांकि वो इससे इनकार करते हैं.
अगर राज्य की संसद में उन्हें सीधे तौर पर जनादेश नहीं मिलता है, तो भी वो एक सीट जीत सकते हैं, क्योंकि वो अपनी पार्टी के बड़े नेताओं की लिस्ट में सबसे ऊपर आते हैं.
जर्मनी में एक साल बाद आम चुनाव होने हैं. क्षेत्रीय चुनाव के जो नतीजे सामने आ रहे हैं, वो चांसलर ओलाफ़ शॉल्त्स की गठबंधन सरकार के लिए चिंताजनक हैं.
जर्मनी में क्षेत्रीय चुनाव पांच साल में एक बार होते हैं. हर राज्य अलग-अलग तारीखों पर चुनाव करवा सकता है.
