प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का उद्घाटन किया. उन्होंने इसे दुनिया की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक एआई समिट में से एक बताते हुए 140 करोड़ भारतीयों की ओर से सभी वैश्विक प्रतिनिधियों का स्वागत किया.
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस समिट में 100 से अधिक देशों की भागीदारी हो रही है. दुनिया भर से आए विशेषज्ञ, नीति निर्माता और युवा प्रतिभागी इस आयोजन को नई दिशा दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह समिट ऐसे भारत में हो रही है, जो मानवता के लगभग छठे हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है और दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी तथा विशाल टेक टैलेंट पूल का केंद्र है.
“AI भविष्य तय करेगी”
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि आज एआई को जिस दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा, वही भविष्य को निर्धारित करेगी. मशीन लर्निंग से लर्निंग मशीन तक का सफर तेज और व्यापक है, इसलिए विजन भी बड़ा और जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि भविष्य में एआई क्या कर सकती है, बल्कि यह है कि वर्तमान में हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किस उद्देश्य और दिशा में कर रहे हैं.
AI को बनाना होगा ह्यूमन-सेंट्रिक
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि एआई को मशीन-सेंट्रिक से ह्यूमन-सेंट्रिक बनाना जरूरी है. इसे संवेदनशील, जवाबदेह और नैतिक बनाना ही इस ग्लोबल एआई इम्पैक्ट समिट का मूल उद्देश्य है.
उन्होंने कहा कि भारत एआई को “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की भावना से देखता है. एआई में इंसान केवल डेटा पॉइंट बनकर न रह जाए, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है. खासकर ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एआई को समावेशन और सशक्तिकरण का माध्यम बनाया जाना चाहिए.
पीएम मोदी का ‘MANAV’ विजन
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर ‘MANAV’ विजन पेश किया. उन्होंने बताया:
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M – Moral & Ethical Systems (नैतिक और एथिकल सिस्टम)
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A – Accountable Governance (जवाबदेह शासन व्यवस्था)
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N – National Sovereignty (राष्ट्रीय संप्रभुता)
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A – Accessible & Inclusive (सुलभ और समावेशी व्यवस्था)
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V – Valid & Verifiable Framework (वैध और विश्वसनीय ढांचा)
उन्होंने कहा कि यही सिद्धांत भविष्य की एआई व्यवस्था का आधार बन सकते हैं.
“AI में डर नहीं, भविष्य देखें”
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया में दो तरह के लोग हैं—एक वे जिन्हें एआई में डर दिखाई देता है और दूसरे वे जिन्हें अवसर और भविष्य नजर आता है.
उन्होंने कहा कि भारत को एआई में भय नहीं, बल्कि भविष्य और भाग्य दिखाई देता है. इसी विश्वास के साथ देश एआई को मानव केंद्रित विकास और वैश्विक कल्याण के साधन के रूप में आगे बढ़ा रहा है.
