नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA) 27 जनवरी 2026 को हुआ। यह बहुप्रतीक्षित समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वान डेर लेयेन की मौजूदगी में संपन्न हुआ। 14 वर्षों के लंबित इंतजार के बाद यह समझौता भारत और यूरोप के व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने वाला है।
समझौता कब लागू होगा और क्या होगा लाभ
यह ऐतिहासिक एफटीए 2027 में लागू होगा, जब सभी 27 सदस्य देशों की संसदों से पारित हो जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह समझौता कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है:
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कृषि और डेयरी सेक्टर को विशेष लाभ।
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कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर, हस्तशिल्प और फर्नीचर क्षेत्रों के लिए नए अवसर।
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इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर टैरिफ 14% से घटकर शून्य, जिससे विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा।
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रत्न और आभूषण निर्यात में यूरोपीय बाजारों में आसान पहुँच और लागत कम।
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कृषि और समुद्री खाद्य उत्पादों के निर्यात से किसानों और तटीय इलाकों में रहने वालों की आय में वृद्धि।
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फार्मा और मेडिकल उपकरणों पर भी टैरिफ शून्य।
FTA लागू होने के बाद भारत के 17 राज्यों, जैसे पंजाब, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, असम और उत्तर प्रदेश को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
उत्तर प्रदेश में असर
उत्तर प्रदेश में यूरोपीय संघ में निर्यात की हिस्सेदारी वर्तमान में 9–12% है, यानी लगभग 210 हजार करोड़ रुपये का वार्षिक निर्यात। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में यह बढ़कर 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
उद्योग और व्यापार पर प्रभाव
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भारतीय उद्यमियों को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने पर ध्यान देना होगा।
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वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी।
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भारतीय उपभोक्ताओं के लिए यूरोपीय उत्पाद, जैसे कारें, सस्ती और आसानी से उपलब्ध होंगी।
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व्यापार समझौता न केवल आर्थिक वृद्धि बल्कि साझा समृद्धि की दिशा में एक ब्लू प्रिंट भी है।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह समझौता हमारे किसानों और छोटे उद्योगों की यूरोपीय बाजारों तक पहुँच आसान बनाएगा। मैन्युफैक्चरिंग में नए अवसर पैदा करेगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगा।”
वैश्विक महत्व
इस समझौते से यूरोपीय बाजारों में 93% भारतीय निर्यात बिना शुल्क प्रवेश पाएगा। इसे इसलिए ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है। यह समझौता भारत को वैश्विक व्यापार में नई ऊँचाइयों तक ले जाने और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में मजबूती देने वाला कदम है।
