अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद रोकने पर सहमति दे दी है। उन्होंने कहा कि इसके बदले अमेरिका भारतीय सामानों पर लगाए जाने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर देगा। ट्रंप ने इसे ऊर्जा सहयोग और जियो-पॉलिटिक्स के दृष्टिकोण से द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में बड़ा बदलाव बताया।
क्रेमलिन ने कहा – कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली
ट्रंप के इस दावे पर रूस ने प्रतिक्रिया दी है। क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि भारत और रूस की रणनीतिक साझेदारी सर्वोपरि है और उन्हें भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद रोकने के संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।
भारत – रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है। फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया। अमेरिका चाहता है कि रूस युद्ध के लिए पैसा जुटाने में कठिनाई का सामना करे। नवंबर 2025 में रूस पर अमेरिकी-यूरोपीय प्रतिबंधों के दबाव में कुछ भारतीय रिफाइनर ने रूस से आयात कम किया था।
प्रतिबंधों का असर
प्रतिबंधों के कारण दिसंबर 2025 में भारत का रूसी तेल आयात करीब 22% घटकर 1.38 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत ने 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदने और रूस से कच्चे तेल का आयात रोकने पर सहमति जताई है।
पीएम मोदी का बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत-अमेरिका के सहयोग से लोगों को लाभ मिलेगा और नए आर्थिक अवसर खुलेंगे। उन्होंने दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और लोकतंत्रों के बीच सहयोग को महत्व दिया।
