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भारत का पिनाका सिस्टम: अब फ्रांस भी चाहता है भारतीय रॉकेट सिस्टम

भारत अब सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश नहीं रहा; अब वह देसी तकनीक से विकसित हथियारों का निर्यातक भी बन चुका है। इसी क्रम में भारत का मल्टी-बैरल रॉकेट सिस्टम पिनाका फ्रांस की नजर में आ गया है। फ्रांस के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में भारत का दौरा कर पिनाका का मूल्यांकन किया है और इसे अपनी सेना में शामिल करने पर विचार कर रहा है।

पिनाका: भारतीय ताकत का परिचायक

पिनाका रॉकेट सिस्टम भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित किया गया है। यह अपनी श्रेणी में अमेरिकी HIMARS और रूसी Tornado S जैसी प्रणालियों का कड़ा मुकाबला करता है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • एक सिंगल लॉन्चर 44 सेकंड में 12 रॉकेट दाग सकता है।

  • एक पूरी बैटरी में 6 लॉन्चर होते हैं, जो 1 मिनट में 72 रॉकेट दाग सकते हैं।

  • मल्टी-डायरेक्शन फायरिंग क्षमता, यानी हर लॉन्चर अलग दिशा में रॉकेट दाग सकता है।

  • मैदान, रेगिस्तान और पहाड़ सभी इलाके में प्रभावी।

  • शूट एंड स्कूट क्षमता, जिससे फायर करने के बाद तेजी से अपनी जगह बदल सकता है।

  • चार ऑपरेशन मोड: ऑटोनोमस, स्टैंड अलोन, रिमोट और मैनुअल।

  • पहाड़ी और ऊंचाई वाले इलाकों में भी प्रभावी।

रेंज:

  • पिनाका का मौजूदा वर्जन: 75–90 किलोमीटर।

  • पिनाका एमके3: 120–130 किलोमीटर।

  • एमके4 पर काम जारी, संभावित रेंज 300 किलोमीटर तक।

कीमत में किफायती:

  • पिनाका सिस्टम की कीमत लगभग ₹2.3 करोड़।

  • तुलना: अमेरिकी HIMARS सिस्टम की कीमत करीब ₹19.5 करोड़।

फ्रांस के लिए अवसर

फ्रांस अपनी सेना के पुराने M270 रॉकेट सिस्टम को अपग्रेड करना चाहता है। तत्काल जरूरत के लिए पिनाका को विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। अगर यह डील फाइनल होती है, तो यह भारतीय हथियार निर्यात के लिए बड़ी उपलब्धि होगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय रक्षा तकनीक की मान्यता होगी।

क्यों खास है पिनाका

  • फायरिंग पावर और गति के दम पर यह कम समय में बड़े इलाके को निशाना बना सकता है।

  • इसे हर मौसम और भू-भाग में इस्तेमाल किया जा सकता है।

  • इसके स्वदेशी तकनीक होने के कारण किसी भी पुर्जे के लिए विदेश पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

  • वैश्विक मल्टी-बैरल रॉकेट सिस्टम की रैंकिंग में टॉप 5 में शामिल।

भारत के लिए यह केवल निर्यात का मौका नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय रक्षा क्षमता को मजबूत करने और वैश्विक हथियार बाजार में अपनी पकड़ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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