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कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़: अस्पताल में सन्नाटा और खुलासे ..

कानपुर, उत्तर प्रदेश: रावतपुर इलाके के एक चार मंजिला अस्पताल में हमेशा मरीजों और डॉक्टरों की भीड़ रहती थी, लेकिन अचानक वहां अजीब सन्नाटा फैल गया। न मरीज, न डॉक्टर, न स्टाफ – सिर्फ खाली कमरे, बिखरी फाइलें और अधूरी छूटी जिंदगी के निशान। यही वह जगह थी, जहां अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का जाल चल रहा था।सिक्योरिटी गार्ड के अनुसार, “डॉक्टर साहब और डॉक्टराइन को कल ही पुलिस ले गई… उसके बाद सब भाग गए।”

अस्पताल के भीतर का नज़ारा

रिसेप्शन पर कुर्सियां अपनी जगह पर थीं, लेकिन उन पर बैठने वाला कोई नहीं था। काउंटर पर रजिस्टर खुले पड़े थे, और डॉक्टर के केबिन में सम्मान पत्र और तस्वीरें अब भी टंगी थीं। मेज पर फाइलें बिखरी थीं और दवाइयों के डिब्बे खुले पड़े थे। इमरजेंसी रूम में टंगी ड्रिप, आधी इस्तेमाल हुई दवाइयां और बेड पर सिलवटे वाली चादरें यह दर्शाती हैं कि यहां हाल ही में मरीज थे।

ट्रांसप्लांट रैकेट का तरीका

ऑपरेशन के बाद डोनर और रिसीवर को अलग-अलग जगहों पर रखा जाता था ताकि किसी भी जांच में पूरे नेटवर्क का पता न चल पाए। डोनर की पहचान बदली गई और रिसीवर को किसी अन्य अस्पताल में शिफ्ट किया गया। इस रैकेट का खुलासा तब हुआ जब डोनर को तय रकम से कम पैसे मिले और उसने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।

छापेमारी और गिरफ्तारी

क्राइम ब्रांच ने देर रात कई अस्पतालों में एक साथ छापेमारी की। इसमें प्रिया हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर, आहूजा हॉस्पिटल और मेडलाइफ हॉस्पिटल शामिल थे। जांच के दौरान कई संदिग्ध दस्तावेज, मरीजों की जानकारी और अन्य सबूत जुटाए गए।अस्पताल संचालकों, डॉक्टर दंपति और दलाल शिवम को हिरासत में लिया गया। डोनर ‘आयुष’ ने खुद को MBA का छात्र बताया। सूत्रों के अनुसार, एक छात्रा से करीब 4 लाख रुपये में किडनी डोनेट करवाई गई और उसे बाद में 45-50 लाख रुपये में बेचने की आशंका जताई गई।

यह मामला उजागर होने के बाद पुलिस ने पूरे नेटवर्क को पकड़ने के लिए कार्रवाई तेज कर दी है।

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