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केजीएमयू रेस्पिवॉक कॉन्फ्रेंस: चार वर्कशॉप आयोजित, बनेगा देश का पहला पल्मोनरी रिहैब सेंटर

लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग द्वारा आयोजित रेस्पिवॉक कॉन्फ्रेंस का शनिवार को भव्य शुभारंभ हुआ। इस शैक्षणिक आयोजन में देशभर के विभिन्न एम्स और चिकित्सा संस्थानों से करीब 300 पल्मोनोलॉजिस्ट, जनरल फिजिशियन, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ, पीजी रेजिडेंट्स और फिजियोथेरेपिस्ट ने भाग लिया।

कार्यक्रम की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानन्द ने कहा कि प्रभावी रोग नियंत्रण के लिए चिकित्सकों को निरंतर प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकों से अपडेट रहना जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नई तकनीकों के उपयोग से न केवल रोगों की सटीक पहचान संभव होती है, बल्कि इलाज की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।

कॉन्फ्रेंस के आयोजक डॉ. सूर्यकान्त ने बताया कि पहले दिन चार प्रमुख वर्कशॉप आयोजित की गईं, जिनमें पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन, मैकेनिकल वेंटिलेशन, इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (आईएलडी) और स्लीप मेडिसिन शामिल हैं। इन वर्कशॉप्स में प्रतिभागियों को थ्योरी के साथ-साथ हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण भी दिया गया।

उन्होंने बताया कि पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन वर्कशॉप में क्रॉनिक श्वसन रोगों के प्रबंधन, मरीज चयन, उपचार योजना और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही 6 मिनट वॉक टेस्ट, ब्रीदिंग एक्सरसाइज, मसल ट्रेनिंग और न्यूट्रिशन काउंसलिंग जैसे व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए।

मैकेनिकल वेंटिलेशन वर्कशॉप में वेंटिलेशन के मूल सिद्धांत, विभिन्न वेंटिलेटर मोड्स, नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन (NIV) और हाई-फ्लो नेजल कैन्युला (HFNC) के उपयोग पर विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया। वहीं, आईएलडी वर्कशॉप में रोग की पहचान, रेडियोलॉजिकल जांच और उपचार रणनीति पर केस-आधारित प्रशिक्षण दिया गया।

स्लीप मेडिसिन सत्र में स्लीप एपनिया और अन्य नींद से जुड़े विकारों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि देश में बड़ी संख्या में लोग इस समस्या से प्रभावित हैं, जिससे डायबिटीज, हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

डॉ. सूर्यकान्त ने बताया कि केजीएमयू में जल्द ही देश का पहला पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा, जहां देशभर के डॉक्टरों और फिजियोथेरेपिस्ट को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। सम्मेलन के दूसरे दिन विशेषज्ञ व्याख्यान, पैनल डिस्कशन और वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए जाएंगे।

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