रिपोर्ट – प्रिया बाजपेयी शुक्ला
लखनऊ। मोहर्रम के अंतिम दिन शनिवार को राजधानी में पारंपरिक चुप ताजिया जुलूस निकाला गया। सुबह बारिश के बीच अकीदतमंद करीब 3 किलोमीटर तक पैदल चले। जुलूस की अगुआई कर रहे सफेद दुलदुल घोड़े को लोगों ने अकीदत के साथ चूमा।

जुलूस से पहले शिया धर्मगुरु मौलाना एजाज अतहर ने मजलिस पढ़ी। इसके बाद जुलूस अकबरीगेट, नक्खास और बिल्लौचपुरा चौराहे से होते हुए गिरधारी सिंह इंटर कॉलेज, मंसूर नगर पहुंचा और सआदतगंज स्थित रौजा-ए-काजमैन में संपन्न हुआ।
जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद और अजादार शामिल हुए। लोगों ने नम आंखों से हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद किया। बारिश के दौरान ताजिया को भीगने से बचाने के लिए उसे पॉलिथीन से ढका गया। जुलूस में ऊंट और विभिन्न तरह के निशान भी शामिल रहे।

अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का संदेश
मौलाना एजाज अतहर ने मजलिस में कर्बला की जंग का जिक्र करते हुए कहा कि इमाम हुसैन ने इंसानियत और सच्चाई की खातिर अत्याचार के खिलाफ संघर्ष किया। उन्होंने संदेश दिया कि अत्याचारी कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, उसके खिलाफ आवाज जरूर उठानी चाहिए।

मोहर्रम के सभी जुलूसों को खास बताते हुए मौलाना एजाज ने कहा कि चुप ताजिया जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद और अजादार शामिल हुए। मरसिया पढ़कर इमाम हुसैन और उनके साथियों को याद किया गया और पुरसा पेश किया गया। चुप ताजिया के साथ करीब 2 महीने 8 दिन बाद मोहर्रम का समापन हुआ।
