रक्षा मंत्री Rajnath Singh के ड्रीम प्रोजेक्ट लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की रफ्तार सुस्त पड़ती जा रही है। बार-बार डेडलाइन बढ़ने के बावजूद यह महत्वाकांक्षी परियोजना अभी तक पूरी नहीं हो सकी है, जिससे आम लोगों का इंतजार लंबा होता जा रहा है।
करीब 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद लखनऊ से कानपुर की दूरी महज 45 मिनट में तय होने का दावा किया गया था। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अप्रैल 2026 तक भी कई हिस्सों में काम अधूरा पड़ा है।
बार-बार बदली डेडलाइन
इस परियोजना को पहले जुलाई 2025 तक पूरा किया जाना था। उस समय केवल 70% काम ही पूरा हो पाया था। इसके बाद अक्टूबर 2025, फिर 31 दिसंबर 2025, 28 फरवरी 2026 और आखिर में 31 मार्च 2026 की नई तारीखें दी गईं—लेकिन हर बार समयसीमा फेल साबित हुई।
रैंप और कनेक्टिविटी अभी भी अधूरी
एक्सप्रेसवे के दूसरे टोल शिवपुर (खांडेदेव) पर चढ़ने-उतरने वाले रैंप तक पूरी तरह तैयार नहीं हैं। हरौनी और जुनाबगंज को जोड़ने वाले फ्लाईओवर और 250-250 मीटर के रैंप पर भी सड़क निर्माण नहीं हो सका है।
इतना ही नहीं, 45 किमी के ग्रीनफील्ड हिस्से में भी कई स्थानों पर काम अधूरा है।
सुविधाओं का भी अभाव
सड़क परिवहन मंत्रालय की एजेंसी इंडियन हाईवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (IHMCL) को यहां ट्रामा सेंटर और रेस्तरां जैसी सुविधाएं विकसित करनी थीं, लेकिन अब तक सिर्फ जमीन की घेराबंदी ही हो सकी है। निर्माण कार्य शुरू तक नहीं हुआ है।
देरी पर सवाल, जवाब नहीं
कार्यदायी संस्था पीएनसी द्वारा देरी को लेकर क्या कार्रवाई की गई और कितना जुर्माना लगाया गया—इस पर NHAI ने कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। इससे पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
जनता का सवाल: कब दौड़ेगा एक्सप्रेसवे?
31 मार्च 2026 की डेडलाइन भी निकल चुकी है, लेकिन 11 अप्रैल तक परियोजना अधूरी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर वाहनों का संचालन कब शुरू होगा।
