रिपोर्ट: प्रिया बाजपेयी शुक्ला
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के सआदतगंज स्थित ब्राह्मण टोला में तीन लोगों की गोली मारकर हत्या के मामले में चबूतरे के चौड़ीकरण और कार पार्किंग को लेकर पुराना विवाद सामने आया है। शुरुआती जांच के मुताबिक, बरगद के पेड़ के नीचे बने चबूतरे को 9 इंच चौड़ा करने की मांग को लेकर दो पक्षों के बीच तनाव बढ़ा था। सोमवार सुबह यह विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। आरोप है कि ऋषभ शुक्ला ने शिवाजी तिवारी, उनके भाई शिवेंद्र उर्फ शंभू और बेटे सुयश की गोली मारकर हत्या कर दी।
घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया। मंगलवार को पोस्टमॉर्टम के बाद तीनों के शव घर पहुंचे तो परिजनों और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आश्वासन के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए। उधर, मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे, जिसके बाद सआदतगंज थाने के इंस्पेक्टर और चौकी प्रभारी को निलंबित कर दिया गया।
ट्यूबवेल और सड़क निर्माण के बाद बढ़ा विवाद
जानकारी के मुताबिक, करीब डेढ़ महीने पहले नगर निगम ने शिव मंदिर के पास खाली सरकारी जमीन पर ट्यूबवेल लगवाया था। इलाके में सड़क का निर्माण भी कराया गया था। इसके बाद शिवाजी तिवारी ने बरगद के पेड़ के पास चबूतरा बनवाने की मांग की। नगर निगम की ओर से निर्माण शुरू कराया गया तो ऋषभ शुक्ला का परिवार इसका विरोध करने लगा।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, चबूतरे को करीब 9 इंच चौड़ा करने को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। मामला थाने तक पहुंचा और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत भी की, लेकिन विवाद का स्थायी समाधान नहीं निकल सका।
आरोप है कि पुलिस ने शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। इसी बीच दोनों परिवारों के बीच तनाव बना रहा। सोमवार सुबह विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और तीन लोगों की जान चली गई।
गैराज का रास्ता बंद होने की आशंका से विरोध
स्थानीय लोगों का आरोप था कि ऋषभ शुक्ला के परिवार ने नजूल की जमीन पर कब्जा कर रखा था। इसी वजह से शिवाजी तिवारी समेत मोहल्ले के कुछ लोगों ने नगर निगम से बरगद के पेड़ के नीचे बने चबूतरे को बनवाने और चौड़ा करने की मांग की थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
दूसरी ओर, ऋषभ शुक्ला का परिवार चबूतरे के चौड़ीकरण का विरोध कर रहा था। उनका तर्क था कि इससे गैराज का रास्ता कम हो जाएगा और मुख्य गेट से आने-जाने में परेशानी होगी।
ब्राह्मण टोला में ऋषभ शुक्ला के घर के बाहर ही बरगद का पेड़ और सार्वजनिक जगह थी। स्थानीय लोग यहां अक्सर अपने वाहन खड़े करते थे। पार्किंग को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच तनाव बना रहता था।
घटना से एक दिन पहले भी हुआ था विवाद
मृतकों के परिजनों ने आरोप लगाया कि हत्या से एक दिन पहले भी कार पार्किंग को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था। इस दौरान गाली-गलौज और धमकी देने की बात सामने आई थी। परिजनों के मुताबिक, दोनों पक्ष पुलिस के पास भी पहुंचे थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मंगलवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान मृतक शिवेंद्र उर्फ शंभू की बेटी सुमेधा ने पुलिस पर मिलीभगत का आरोप लगाया। परिवार का दावा है कि आरोपी और उसके चाचा के खिलाफ पहले से आपराधिक मामले होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
भाजपा के प्रदेश महामंत्री अभिजात मिश्रा ने भी मामले में बीट कॉन्स्टेबल और दरोगा की भूमिका पर सवाल उठाए। वहीं, स्थानीय भाजपा पार्षद अनूप कुमार सक्सेना ने बताया कि सड़क और ट्यूबवेल का निर्माण नगर निगम ने कराया था। चबूतरे को लेकर विवाद थाने तक पहुंचा था, जिसके बाद उसका निर्माण रुक गया था।
डिप्टी सीएम के आश्वासन के बाद हुआ अंतिम संस्कार
तीन लोगों की हत्या के बाद मंगलवार को परिजनों और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। पोस्टमॉर्टम के बाद शव घर पहुंचे तो लोगों ने सड़क जाम कर दी। इस दौरान डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक मृतकों के परिजनों से मिलने पहुंचे। उनके पहुंचने पर लोगों ने पुलिस कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई और नारेबाजी की।
डिप्टी सीएम ने परिवार को आश्वासन दिया कि शिवेंद्र तिवारी उर्फ शंभू की पत्नी रुचि तिवारी को सरकारी नौकरी दी जाएगी। उनकी बेटी की पढ़ाई का खर्च आजीवन सरकार उठाएगी। परिवार को सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई का भी आश्वासन दिया।
इसके बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए। ब्रजेश पाठक ने अर्थी को कंधा दिया और अंतिम संस्कार में शामिल हुए। करीब पांच घंटे के इंतजार के बाद गुलाला घाट पर तीनों शवों का अंतिम संस्कार किया गया।
इस दौरान परिवार की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल रहा। मृतकों की मां ने आरोपी के लिए कड़ी सजा की मांग की।
आरोपी के घर की बाउंड्री पर चला बुलडोजर
घटना के बाद प्रशासन ने आरोपी के घर के खिलाफ भी कार्रवाई की। डिप्टी सीएम के आश्वासन के करीब छह घंटे बाद रात लगभग 10 बजे लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने बुलडोजर से आरोपी ऋषभ शुक्ला के घर की बाउंड्री का हिस्सा गिरा दिया। इससे पहले अधिकारियों ने मकान को सील किया था।
LDA अधिकारियों के मुताबिक, बाउंड्री का हिस्सा सड़क की जमीन पर बनाया गया था, इसलिए उसे हटाने की कार्रवाई की गई। इस दौरान आरोपी के चाचा गिरीश समेत परिवार के अन्य सदस्यों के घरों से सामान बाहर निकाले जाने की भी जानकारी सामने आई।
उधर, पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा ने सआदतगंज थाने के इंस्पेक्टर संतोष कुमार आर्य और चौकी प्रभारी अजय कुमार चौरसिया को निलंबित कर दिया। मामले में पुलिस की पूर्व कार्रवाई और विवाद को संभालने में उसकी भूमिका की जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
चबूतरे और पार्किंग का विवाद बना तीन हत्याओं की वजह
लखनऊ के इस तिहरे हत्याकांड में शुरुआती जांच के दौरान चबूतरे के चौड़ीकरण, नजूल की जमीन और कार पार्किंग को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद की बात सामने आई है। परिजनों ने पुलिस पर समय रहते कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। अब मामले में हत्या की जांच के साथ-साथ पूर्व शिकायतों पर पुलिस की कार्रवाई की भी पड़ताल अहम होगी।
