महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। मान्यता है कि इसी तिथि पर भगवान Shiva और माता Parvati का विवाह हुआ था। इसलिए यह दिन शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। इस पावन अवसर पर विधि-विधान से पूजा करने पर साधक को शुभ फल, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।
अजमेर स्थित श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर कुछ विशेष वस्तुएं अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है।
महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं?
1️⃣ गंगाजल से अभिषेक
शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करना अत्यंत पवित्र माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे मोक्ष की प्राप्ति और दुखों का नाश होता है। महाशिवरात्रि के दिन गंगाजल से अभिषेक विशेष फलदायी होता है।
2️⃣ शहद
शिवलिंग पर शहद चढ़ाने या उससे अभिषेक करने से धन-लाभ और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। इसे सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
3️⃣ घी
घी अर्पित करने से वंश वृद्धि और पारिवारिक सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
4️⃣ सरसों का तेल
ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा के अनुसार, महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर सरसों का तेल चढ़ाना ग्रह दोषों से मुक्ति दिलाता है। इससे रुके हुए कार्य भी बनने लगते हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
5️⃣ बेलपत्र
बेलपत्र को शिव पूजा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। महाशिवरात्रि के दिन बेलपत्र चढ़ाने से भाग्य में वृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
6️⃣ शमी पत्र और पुष्प
शिव जी को शमी के पत्ते, बेला और हरसिंगार के फूल अर्पित करने से भी इच्छित फल की प्राप्ति होती है।
महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
महाशिवरात्रि केवल पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और साधना का अवसर है। इस दिन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप, रात्रि जागरण और शिव-पार्वती की पूजा विशेष फलदायी मानी गई है।
श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा साधक को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में संतुलन प्रदान करती है।
15 फरवरी 2026 को पड़ने वाली महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का गंगाजल, शहद, घी, सरसों का तेल, बेलपत्र और पुष्पों से अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना गया है। सच्ची श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है।
