महोबा जिले के कबरई थाना क्षेत्र के मकरबई गांव से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां बेटी की शादी की खुशियां अचानक मातम में बदल गईं। जिस घर में कुछ ही दिनों बाद शहनाई बजनी थी, वहां अब चीख-पुकार का माहौल है।
गांव निवासी 42 वर्षीय ऊषा सिंह, पत्नी धीरेंद्र सिंह, अपनी 21 वर्षीय बेटी सपना की शादी की तैयारियों में जुटी थीं। सपना की शादी 28 अप्रैल को तय थी और घर में खुशी का माहौल था। शादी के कार्ड भी छप चुके थे और परंपरा के अनुसार पहला निमंत्रण भगवान को देने की तैयारी चल रही थी।
इसी परंपरा को निभाने के लिए ऊषा सिंह अपने 15 वर्षीय बेटे नागेंद्र के साथ बाइक से मध्य प्रदेश के ओरछा स्थित रामराजा सरकार मंदिर के लिए निकलीं। लेकिन रास्ते में गांव का जर्जर रेलवे अंडरब्रिज उनकी जिंदगी पर भारी पड़ गया।
ग्रामीणों के अनुसार, अंडरब्रिज की हालत बेहद खराब है और वहां ट्रकों की भारी आवाजाही के कारण बाइक निकालना मुश्किल होता है। इसी वजह से ऊषा सिंह ने अपने बेटे को बाइक निकालने के लिए कहा और खुद पैदल रेलवे ट्रैक पार करने लगीं।
दुर्भाग्यवश, जैसे ही वह ट्रैक पार कर रही थीं, उसी समय तेज रफ्तार झांसी-बांदा मेमू ट्रेन आ गई और वह उसकी चपेट में आ गईं। हादसा इतना भीषण था कि मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
इस घटना से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ऊषा सिंह अपने पीछे 18 वर्षीय पुत्र मानवेंद्र, 15 वर्षीय नागेंद्र और बेटी सपना को छोड़ गई हैं। जिस घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, वहां अब मातम पसरा हुआ है।
ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अंडरब्रिज और रास्ते की बदहाल स्थिति के कारण यहां अक्सर हादसे होते रहते हैं। लोगों ने मांग की है कि जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।
यह हादसा न केवल एक परिवार के लिए, बल्कि पूरे गांव के लिए गहरा आघात बन गया है। गांव में हर किसी की जुबान पर एक ही बात है—अगर रास्ता सही होता, तो शायद एक मां की जान बचाई जा सकती थी।
