मध्यप्रदेश में टीईटी (TET) अनिवार्यता को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। लाखों शिक्षकों से जुड़े इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री Digvijaya Singh ने मुख्यमंत्री Mohan Yadav को पत्र लिखकर इस नियम पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला बड़ी संख्या में शिक्षकों को प्रभावित कर रहा है, इसलिए इसे जल्दबाजी में लागू करना उचित नहीं होगा।
अपने पत्र में दिग्विजय सिंह ने अपील की है कि टीईटी नियम को भूतलक्षी प्रभाव से लागू करने के बजाय भविष्यलक्षी बनाया जाए। उनका मानना है कि पहले से कार्यरत शिक्षकों पर इस नियम का असर नहीं पड़ना चाहिए। साथ ही, उन्होंने अंतिम निर्णय आने तक टीईटी अनिवार्यता को स्थगित रखने की भी मांग की है।
राज्य में इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सरकार के फैसले के बाद शिक्षकों के बीच असंतोष बढ़ गया है। कई शिक्षक संगठनों ने भी इसका विरोध करते हुए कहा है कि अचानक लागू किए गए इस नियम से उनकी नौकरी पर संकट खड़ा हो सकता है।
करीब दो लाख से अधिक शिक्षकों की चिंता को देखते हुए यह मामला अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
राजनीतिक दृष्टि से भी दिग्विजय सिंह का यह पत्र महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया है कि इस मामले में रिव्यू या क्यूरेटिव पिटिशन दायर करने पर विचार किया जाए, जिससे संकेत मिलता है कि यह मामला आगे कानूनी स्तर तक भी जा सकता है।
