मुंबई में इस साल मॉनसून की शुरुआत 23 जून को हुई थी। इसके बाद शुरुआती 48 घंटों में शहर में जोरदार बारिश दर्ज की गई, लेकिन 28 जून के बाद बारिश कुछ समय के लिए थम गई। इसके बावजूद जून महीने में कुल बारिश सामान्य से काफी कम रही, जिसे पिछले 146 वर्षों में सबसे शुष्क जून माना जा रहा है।
बारिश की कमी का सीधा असर मुंबई के जलाशयों पर पड़ा है। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के अनुसार शहर को पानी सप्लाई करने वाले सात प्रमुख झीलों और बांधों में कुल जल भंडार घटकर लगभग 7 प्रतिशत के आसपास रह गया है।
सात जलाशयों की स्थिति
मुंबई को अपर वैतरणा, मिडिल वैतरणा, भातसा, तानसा, मोदक सागर, तुलसी और विहार जलाशयों से पानी की आपूर्ति होती है। ये सभी पूरी तरह मानसूनी बारिश पर निर्भर हैं।
BMC के आंकड़ों के मुताबिक, अपर वैतरणा जलाशय में उपयोग योग्य पानी लगभग समाप्त हो चुका है। वहीं तानसा बांध में भी पानी का स्तर बेहद कम है। मिडिल वैतरणा में लगभग 11.53 प्रतिशत, भातसा में 6 प्रतिशत से भी कम पानी बचा है। मोदक सागर में 18.47 प्रतिशत पानी उपलब्ध है।
हालांकि विहार और तुलसी जलाशयों में हाल की बारिश से कुछ सुधार देखा गया है, जहां स्तर क्रमशः 45.13 प्रतिशत और 24.26 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसके बावजूद कुल मिलाकर जल भंडार घटकर लगभग 6.93 प्रतिशत पर आ गया है।
मौसम विभाग का अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई, ठाणे और पालघर जिलों में आने वाले दिनों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। 2 जुलाई तक ‘येलो अलर्ट’ घोषित किया गया है, जिसमें तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना जताई गई है।
तापमान और राहत की उम्मीद
बारिश के बाद अगले 3 से 4 दिनों में तापमान में 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने का अनुमान है। इससे मुंबईवासियों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिलने की संभावना है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, जुलाई की बारिश जलाशयों के स्तर को सुधारने में अहम भूमिका निभा सकती है।
