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वंदे मातरम् पर नई गाइडलाइन: सभी 6 अंतरे गाने के निर्देश, मुस्लिम नेताओं ने जताई आपत्ति

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। निर्देशों के मुताबिक अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और अन्य आधिकारिक आयोजनों में वंदे मातरम् गाया जाएगा। यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों गाए या बजाए जाएं, तो पहले वंदे मातरम् प्रस्तुत किया जाएगा।

नई गाइडलाइन के अनुसार अब राष्ट्रगीत के सभी छह अंतरे निर्धारित समय 3 मिनट 10 सेकेंड में गाए जाएंगे। अब तक आमतौर पर इसके पहले दो अंतरे ही गाए जाते थे।

मुस्लिम नेताओं की प्रतिक्रिया

सरकार के इस फैसले पर कुछ मुस्लिम नेताओं ने आपत्ति जताई है। पूर्व सपा सांसद एसटी हसन ने कहा कि भारत अनेकता में एकता का देश है और सभी धर्मों का सम्मान इसकी पहचान है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग वंदे मातरम् को इबादत के रूप में देखते हैं, जबकि इस्लाम में जमीन की पूजा की अनुमति नहीं है।

हसन ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को किसी गीत या नारे के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “इससे न तो महंगाई कम होगी और न रोजगार बढ़ेगा, बल्कि इससे विवाद पैदा होगा।”

उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे मुद्दों से समाज में ध्रुवीकरण बढ़ सकता है और लोगों के बीच अनावश्यक विवाद खड़ा हो सकता है।

अबू आजमी और इमरान मसूद की राय

महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अबू आजमी ने कहा कि देश संविधान से चलता है और किसी की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने धर्म के अनुसार आचरण करने की स्वतंत्रता है।

वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि संविधान हर नागरिक को अपने धर्म का पालन अपने तरीके से करने का अधिकार देता है और किसी पर कोई जोर-जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए।

बहस तेज

सरकार की नई गाइडलाइन के बाद राष्ट्रगीत को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। एक ओर इसे राष्ट्रीय एकता से जोड़कर देखा जा रहा है, तो दूसरी ओर धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों के संदर्भ में सवाल उठाए जा रहे हैं।

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