नोएडा। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र Noida में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर सोमवार को हजारों श्रमिक सड़कों पर उतर आए। देखते ही देखते यह प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसके बाद पूरे मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है।
प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर तोड़फोड़ और हंगामे की खबरें सामने आईं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। मामले में अब तक 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

सरकार का बड़ा फैसला
श्रमिकों के उग्र प्रदर्शन को देखते हुए राज्य सरकार ने सोमवार देर रात ही अंतरिम मजदूरी में 21 प्रतिशत बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया। हालांकि, इस फैसले के बावजूद विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है और विपक्ष इसे लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है।
विपक्ष का हमला
समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में अन्याय अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक दबाव के कारण मजदूर सड़कों पर उतरने को मजबूर हो रहे हैं।
वहीं, कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने इस घटना को श्रमिकों की “आखिरी चीख” बताया। उन्होंने कहा कि कम वेतन और बढ़ते खर्च के कारण मजदूरों की हालत बेहद खराब हो चुकी है।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष Ajay Rai ने भी इस घटना को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और कहा कि महंगाई और कम वेतन के चलते युवाओं में आक्रोश बढ़ रहा है।
सरकार का जवाब
वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे साजिश की आशंका जताई है। श्रम मंत्री Anil Rajbhar ने कहा कि यह प्रदर्शन प्रदेश की शांति और विकास को बाधित करने के उद्देश्य से कराया गया प्रतीत होता है। उन्होंने ‘पाकिस्तानी हैंडलर्स’ और बाहरी ताकतों की भूमिका की भी जांच की बात कही।
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने औद्योगिक अशांति फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने उद्यमियों से श्रमिकों के साथ संवाद बनाए रखने की अपील की है।
सख्ती के निर्देश
पुलिस महानिदेशक Rajeev Krishna ने कहा कि माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाले तत्वों को चिन्हित किया जा रहा है और उनके खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही बाहरी लोगों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।
बढ़ता असंतोष बना वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई, कम वेतन और जीवनयापन की लागत में लगातार इजाफा श्रमिकों के आक्रोश का मुख्य कारण है। यही वजह है कि यह प्रदर्शन अचानक उग्र रूप ले बैठा।
फिलहाल, स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है, लेकिन इस घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था, श्रमिक नीतियों और राजनीतिक माहौल पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
