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अखिलेश की गैरमौजूदगी पर ओपी राजभर का राहुल गांधी पर हमला, बोले- ‘डिंपल या धर्मेंद्र को क्यों नहीं भेजा?’

न्यूज डेस्क ,लखनऊ

लखनऊ। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की INDIA गठबंधन की बैठक से गैरमौजूदगी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है। राजभर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सवाल उठाते हुए कहा कि अगर अखिलेश यादव खुद बैठक में शामिल नहीं हो सकते थे तो डिंपल यादव या धर्मेंद्र यादव को भेज सकते थे।

30 सितंबर को नई दिल्ली में हुई INDIA गठबंधन की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। अखिलेश यादव बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हुए। रिपोर्टों के मुताबिक उनकी ओर से सपा के प्रतिनिधि बैठक में मौजूद रहे।

‘6 अक्टूबर तक नामांकन था, इतनी जल्दी जाने की क्या जरूरत थी?’

ओपी राजभर ने अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। ऐसे में उन्होंने सवाल किया कि अखिलेश यादव के लिए पहले ही नामांकन से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होना इतना जरूरी क्यों था।

राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि अगर अखिलेश यादव खुद बैठक में नहीं जा सकते थे तो डिंपल यादव या धर्मेंद्र यादव को भेजा जा सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश यादव चाहें तो ऑनलाइन माध्यम से भी बैठक से जुड़ सकते थे।

हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी को उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव और अन्य निर्धारित राजनीतिक कार्यक्रमों से जोड़ा गया है।

‘अखिलेश एसी में बैठक कर ठहाके लगा रहे थे’

राजभर ने अपने पोस्ट में अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि जब राहुल गांधी दिल्ली में INDIA गठबंधन की बैठक कर रहे थे, उस समय अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में बैठक और प्रेस कॉन्फ्रेंस में व्यस्त थे। राजभर ने सवाल उठाया कि जब दूसरे नेता ऑनलाइन बैठक से जुड़ सकते थे तो अखिलेश यादव ऐसा क्यों नहीं कर सके।

ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर भी राहुल गांधी को घेरा

ओपी राजभर ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार फरवरी 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त बने, जबकि बीजेपी इससे पहले 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव जीत चुकी थी।

राजभर ने राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं द्वारा चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों के संदर्भ में कहा कि पहले चुनावों के इतिहास को देखना चाहिए। उनका तर्क था कि जिन चुनावी परिणामों का जिक्र किया जा रहा है, उनमें से कई ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने से पहले के हैं।

‘जनता के बीच जाने पर ध्यान दें’

राजभर ने राहुल गांधी को सलाह देते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर आरोप लगाने के बजाय विपक्षी नेताओं को जनता के बीच जाकर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लगातार आरोप-प्रत्यारोप और आपसी विवाद से विपक्ष की राजनीतिक चुनौतियां खत्म नहीं होंगी।

राजभर ने अपने बयान में विपक्षी दलों के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान पर भी निशाना साधा और कहा कि नेताओं को आपसी विवाद के बजाय जनता से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

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