कमिश्नर ने कहा कि साध्वी पहले से अस्थमा और श्वसन संबंधी बीमारी से पीड़ित थीं। इसके बावजूद उपचार के दौरान लापरवाही बरती गई। मामले में संबंधित कंपाउंडर के खिलाफ मेडिकल अधिनियम और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
कंपाउंडर पर लापरवाही का आरोप
एसआईटी जांच में सामने आया है कि साध्वी को बिना अधिकृत डॉक्टर की पर्ची के इंजेक्शन लगाया गया। पुलिस के अनुसार, कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित ने उन्हें अस्पताल रेफर नहीं किया। जांच में यह भी सामने आया कि लगाया गया इंजेक्शन शेड्यूल-एच श्रेणी का था, जिसे बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं दिया जा सकता।
पुलिस कमिश्नर ने कहा कि प्रथम दृष्टया लापरवाही के प्रमाण मिले हैं। हालांकि यह स्पष्ट करने के लिए कि इंजेक्शन के कारण ही कार्डियक या पल्मोनरी अरेस्ट हुआ या नहीं, विशेषज्ञ मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
पिता की सोशल मीडिया पोस्ट का नहीं मिला संबंध
कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि साध्वी के पिता द्वारा इंस्टाग्राम पर की गई पोस्ट का मौत से कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया है। अब तक की जांच में उनके किसी दुर्भावनापूर्ण इरादे (मैलाफाइड इंटेंशन) का भी संकेत नहीं मिला है। पहले से दर्ज मामलों का भी इस घटना से कोई कनेक्शन सामने नहीं आया है।
वायरल वीडियो के बाद तनाव में थीं साध्वी
बताया गया कि पिछले वर्ष जुलाई में साध्वी का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद वह मानसिक तनाव में थीं। उस समय उन्होंने बयान दिया था कि पिता-पुत्री के रिश्ते को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है और वह किसी भी प्रकार की जांच के लिए तैयार हैं।
पुलिस ने बताया कि स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग टीम (एसआईटी) मामले की गहन जांच कर रही है। मेडिकल की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
