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केरल का नाम ‘केरलम’ करने पर सियासत तेज, शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए

केंद्र सरकार ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस फैसले पर तंज कसते हुए कहा कि मलयालम में राज्य का नाम पहले से ही ‘केरलम’ है, इसलिए इसे बदलने का निर्णय समझ से परे है। उन्होंने सवाल उठाया कि केवल नाम बदलने से क्या वास्तविक बदलाव होगा।

विकास के मुद्दों पर केंद्र पर निशाना

थरूर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार ने केरल को AIIMS या कोई नया राष्ट्रीय संस्थान नहीं दिया और केंद्रीय बजट में राज्य के लिए कोई विशेष प्रोजेक्ट नहीं रखा। उनके मुताबिक, जब विकास और जरूरी संसाधनों की बात आती है तो सरकार चुप रहती है, लेकिन नाम बदलने जैसे मामलों में तुरंत कार्रवाई कर देती है।

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच यह एक राजनीतिक खेल की तरह हो गया है, जबकि असली प्राथमिकता राज्य के विकास कार्यों पर होनी चाहिए।

सोशल मीडिया पर मजाकिया टिप्पणी

शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए नाम बदलने के बाद संभावित शब्दों को लेकर मजाक किया। उन्होंने पूछा कि ‘केरलाइट’ और ‘केरलमाइट’ शब्द कैसे होंगे। उनका कहना था कि ‘केरलमाइट’ किसी सूक्ष्म जीव जैसा लगता है और ‘केरलमियन’ किसी खनिज जैसा। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय को टैग करते हुए सुझाव दिया कि नए शब्द के लिए प्रतियोगिता आयोजित की जा सकती है।

विधानसभा की मंजूरी और केंद्र की मुहर

दरअसल, केरल विधानसभा पहले ही दो बार राज्य का नाम ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव पारित कर चुकी है। राज्य सरकार की मांग है कि संविधान में संशोधन कर राज्य का नाम उसकी मलयालम वर्तनी के अनुसार किया जाए और इसे आठवीं अनुसूची की सभी भाषाओं में लागू किया जाए।

केंद्र की कैबिनेट ने अब इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि, आधिकारिक रूप से नाम बदलने की प्रक्रिया संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू होगी।

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