हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर भक्तों को शिव कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि आती है।
हर महीने में दो बार त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस दिन भक्त सुबह से व्रत रखकर शाम के समय प्रदोष काल में विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करते हैं और फिर व्रत का पारण करते हैं। मान्यता है कि प्रदोष काल में की गई पूजा विशेष फलदायी होती है।
अप्रैल महीने के पहले प्रदोष व्रत को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह है। वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 15 अप्रैल को रात 12 बजकर 12 मिनट पर होगी और इसका समापन उसी दिन रात 10 बजकर 31 मिनट पर होगा। ऐसे में प्रदोष व्रत 15 अप्रैल को रखा जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
