केंद्र सरकार ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर ‘चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर केरलम’ नाम का उपयोग किया जा रहा है। हालांकि, राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर अब भी ‘केरल’ नाम ही प्रदर्शित हो रहा है।
जानकारों के मुताबिक, ‘केरलम’ नाम का आधिकारिक उपयोग तभी संभव होगा जब प्रस्तावित बदलाव को संवैधानिक प्रक्रिया के तहत मंजूरी मिल जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार को एक विधेयक तैयार कर राष्ट्रपति के पास भेजना होगा।
क्या है संवैधानिक प्रक्रिया?
भारत के संविधान के Article 3 के तहत किसी राज्य का नाम, क्षेत्र या सीमा बदलने का अधिकार संसद को प्राप्त है। लेकिन इस प्रक्रिया की शुरुआत राष्ट्रपति की सिफारिश से ही हो सकती है। राष्ट्रपति संबंधित राज्य की विधानसभा से इस पर राय मांगते हैं।
इस मामले में विधेयक केरल विधानसभा को भेजा जाएगा, जिसे निर्धारित समय के भीतर अपनी राय देनी होगी। हालांकि, विधानसभा की राय संसद के लिए बाध्यकारी नहीं होती। यदि विधानसभा विरोध भी करती है, तब भी संसद तय समय के बाद विधेयक पर आगे बढ़ सकती है।
साधारण बहुमत से पास होगा बिल
राज्य का नाम बदलने वाला विधेयक संविधान संशोधन की कठोर प्रक्रिया के तहत नहीं आता। Article 4 के अनुसार, ऐसे कानून को सामान्य विधेयक की तरह साधारण बहुमत से पारित किया जा सकता है। यानी लोकसभा और राज्यसभा में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के 50 प्रतिशत से अधिक समर्थन की आवश्यकता होगी।
दोनों सदनों से पारित होने के बाद विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलते ही अधिनियम अधिसूचित किया जाएगा और संविधान की पहली अनुसूची (राज्यों के नाम) तथा चौथी अनुसूची (राज्यसभा सीटों का विवरण) में आवश्यक संशोधन स्वतः लागू हो जाएगा।फिलहाल ‘केरलम’ नाम को लेकर अंतिम निर्णय संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।
