रिपोर्ट: प्रिया बाजपेयी शुक्ला
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड में दर्ज FIR को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। मंगलवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने FIR वापस लेने की मांग को लेकर देहरादून में विरोध मार्च निकाला और सचिवालय घेरने की कोशिश की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका, जिसके बाद कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस का आरोप है कि राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। पार्टी नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी ने जातीय भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ संविधान में दिए अधिकारों की ही बात की है।

हल्द्वानी के शुद्धिकरण विवाद से जुड़ा है मामला
राहुल गांधी के खिलाफ FIR हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम को लेकर दर्ज हुई है। पुलिस के मुताबिक, वाल्मीकि समुदाय के एक व्यक्ति की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। शिकायत में आरोप है कि राहुल गांधी ने कार्यक्रम स्थल पर हुए धार्मिक अनुष्ठान को जाति से जोड़कर टिप्पणी की।
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने FIR पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी घटना को छुआछूत और भेदभाव के खिलाफ उठाना अपराध है तो यह गंभीर स्थिति है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की आवाज दबाने के लिए कानूनी कार्रवाई का सहारा लिया जा रहा है।
अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर साधा निशाना
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी राहुल गांधी के समर्थन में भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में दलितों के साथ भेदभाव के मुद्दे को उठाने पर राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करना निंदनीय है।

सीएम धामी ने किया पलटवार
वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार किया। धामी ने कहा कि राहुल गांधी हर मुद्दे में जाति और भेदभाव तलाशते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच अपनापन और सामाजिक मेलजोल को जाति के चश्मे से देखना उचित नहीं है।
राहुल गांधी के खिलाफ FIR और कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के बाद उत्तराखंड में इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव और तेज हो गया है।
