उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि परिसर का स्मारक मंदिर एक बार फिर श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा। इस मंदिर में अब अखंड ज्योति की स्थापना कर दी गई है, जो राम मंदिर आंदोलन और उसके लंबे संघर्ष का प्रतीक मानी जा रही है।
करीब 500 वर्षों तक चले राम जन्मभूमि संघर्ष के दौरान रामलला ने कई स्थानों पर विराजमान होकर भक्तों की आस्था को जीवित रखा। कभी मस्जिद के गर्भगृह में, तो कभी अस्थायी टाट के मंदिर में उनकी पूजा होती रही। वर्ष 1992 में बाबरी ढांचे के विध्वंस के बाद टाट का मंदिर बनाया गया था।
बाद में, 2019 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसके पश्चात रामलला को टाट के मंदिर से हटाकर फाइबर से बने अस्थायी मंदिर में स्थापित किया गया।
22 जनवरी 2024 को भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही वे अपने नव-निर्मित धाम में विराजमान हो गए। इसके बाद फाइबर मंदिर का गर्भगृह खाली हो गया था।
अब उसी पवित्र स्थान पर वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ अखंड ज्योति स्थापित की गई है। आचार्यों द्वारा विधिवत पूजन-अनुष्ठान के बाद यह ज्योति प्रज्वलित की गई, जो निरंतर जलती रहेगी और इस ऐतिहासिक संघर्ष की स्मृति को जीवित रखेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री Yogi Adityanath का भी उल्लेख हुआ, जिन्होंने पहले रामलला को टाट मंदिर से फाइबर मंदिर में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
वहीं, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर के परकोटे में स्थित गणेश मंदिर पर ध्वजारोहण कार्यक्रम भी संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में निर्माण और सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
इस दौरान Champat Rai, Anil Mishra सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।
