उत्तर प्रदेश में बड़े करदाताओं के लिए बड़ी राहत की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देशों के क्रम में राज्य की टैक्स प्रणाली को सरल और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है। अब बड़े करदाताओं की व्यक्तिगत सुनवाई वर्चुअल माध्यम से की जाएगी। यह नई व्यवस्था 20 फरवरी 2026 से प्रभावी होगी।
संयुक्त आयुक्त स्तर पर लागू होगी व्यवस्था
राज्य कर विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह वर्चुअल सुनवाई व्यवस्था संयुक्त आयुक्त (कारपोरेट) एवं संयुक्त आयुक्त (कारपोरेट सेल–ऑयल सेक्टर) स्तर पर लागू की जाएगी।
प्रमुख सचिव, राज्य कर Kamini Ratan Chauhan ने बताया कि प्रदेश के इन श्रेणियों में पंजीकृत करदाताओं की व्यक्तिगत सुनवाई सामान्य परिस्थितियों में अनिवार्य रूप से वर्चुअल माध्यम से आयोजित की जाएगी। यह व्यवस्था Uttar Pradesh Goods and Services Tax Act की विभिन्न धाराओं के अनुरूप होगी।
करदाताओं को मिलेगा विकल्प
विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी विशेष परिस्थिति में करदाता या उनका अधिकृत प्रतिनिधि भौतिक रूप से उपस्थित होकर सुनवाई कराना चाहते हैं, तो वे प्रार्थना पत्र दे सकते हैं। संबंधित अधिकारी उस अनुरोध पर विचार कर आवश्यक अनुमति प्रदान करेंगे।
Ease of Doing Business को मिलेगा बढ़ावा
आयुक्त, राज्य कर, उत्तर प्रदेश Dr. Nitin Bansal ने बताया कि कारपोरेट सर्किल का गठन बड़े करदाताओं को बेहतर और सुगम सेवाएं देने के उद्देश्य से किया गया है।
अब तक जीएसटी से जुड़े अधिकांश कार्य ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किए जा रहे थे, लेकिन न्याय निर्णयन के कुछ मामलों में करदाताओं को व्यक्तिगत रूप से कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था। इससे कई बार:
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समय पर उपस्थिति न हो पाने के कारण स्थगन लेना पड़ता था।
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अधिकारी के अवकाश पर होने से मामलों में देरी होती थी।
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समय, श्रम और संसाधनों की अतिरिक्त खपत होती थी।
वर्चुअल सुनवाई व्यवस्था लागू होने से मामलों का निस्तारण तेज, पारदर्शी और समयबद्ध होगा। साथ ही करदाताओं और विभाग दोनों का समय और संसाधन बचेंगे।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल तकनीक आधारित प्रशासन को मजबूत करने और Ease of Doing Business को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। वर्चुअल सुनवाई से न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी और करदाता-हितैषी बनने की उम्मीद है।
